विधानसभा में बवाल, अफसरशाही पर सवाल !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में अफसरशाही हावी है…..ये हम नहीं बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक और मंत्री बोल रहे हैं। आलम ये है कि विधानसभा सत्र में ये मुद्दा गरमाया रहा…कांग्रेस के चकराता विधायक प्रीतम सिंह की ओर से सदन में विशेषाधिकार हनन का मामला उठाया गया…प्रीतम सिंह ने PMGSY के मुख्य अभियंता पर बार बार फोन करने के बाद भी कॉल रिसीव न करने और न ही मिलने की शिकायत की…वहीं इस मामले में विनिश्चय सुनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी ने कहा कि ये बहुत दुखद और शर्मनाक है…उत्तराखंड जैसी संस्कारों की धरती पर हम एक दूसरे को सम्मान नहीं दे रहे…विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं सरकार को तीसरी बार निर्देशित कर रही हू कि परंपराओ को ताक पर नहीं रखा जा सकता..विधायकों के प्रोटोकॉल को ताक पर नहीं रखा जा सकता शायद अब समय आ गया है कि स्पीकर के माध्यम से मसूरी स्थित लाल बहादुर अकेडमी को पत्र लिखकर अधिकारियों की पढ़ाई में प्रोटोकॉल को भी सिखाने को कहा जाए…..आपको बता दें कि विपक्ष के विधायकों के साथ ही सरकार के मंत्री और विधायक भी इससे परेशान हैं। धामी कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने सचिवों की सीआर लिखने के अधिकार की मांग उठाई थी….हांलाकि तब सतपाल महाराज को अगली बैठक में इसका प्रस्ताव लाने का आश्वासन दिया गया था…लेकिन हुआ ये कि ये प्रस्ताव फिर नहीं आया….वहीं सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु को तलब किया….बंद कमरे में सतपाल महाराज ने भी मुख्य सचिव से अपनी नाराजगी व्यक्त की….सवाल ये है कि आखिर बार बार क्यों राज्य में अफसरशाही बेलगाम होती जा रही है

उत्तराखंड में नौकरशाही के हावी होने का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक और मंत्री इससे परेशान हैं। आलम ये है कि विधानसभा सत्र में ये मुद्दा गरमाया रहा…कांग्रेस के चकराता विधायक प्रीतम सिंह की ओर से सदन में विशेषाधिकार हनन का मामला उठाया गया…प्रीतम सिंह ने PMGSY के मुख्य अभियंता पर बार बार फोन करने के बाद भी कॉल रिसीव न करने और न ही मिलने की शिकायत की…वहीं इस मामले में विनिश्चय सुनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी ने कहा कि ये बहुत दुखद और शर्मनाक है…उत्तराखंड जैसी संस्कारों की धरती पर हम एक दूसरे को सम्मान नहीं दे रहे…विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं सरकार को तीसरी बार निर्देशित कर रही हू कि परंपराओ को ताक पर नहीं रखा जा सकता..विधायकों के प्रोटोकॉल को ताक पर नहीं रखा जा सकता शायद अब समय आ गया है कि स्पीकर के माध्यम से मसूरी स्थित लाल बहादुर अकेडमी को पत्र लिखकर अधिकारियों की पढ़ाई में प्रोटोकॉल को भी सिखाने को कहा जाए…..

आपको बता दें कि नौकरशाही के हावी होने से विपक्ष के विधायकों के साथ ही सरकार के मंत्री और विधायक भी परेशान हैं। धामी कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने सचिवों की सीआर लिखने के अधिकार की मांग उठाई थी….हांलाकि तब सतपाल महाराज को अगली बैठक में इसका प्रस्ताव लाने का आश्वासन दिया गया था…लेकिन हुआ ये कि ये प्रस्ताव फिर नहीं आया….वहीं सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु को तलब किया….बंद कमरे में सतपाल महाराज और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी ने भी मुख्य सचिव से अपनी नाराजगी व्यक्त की….वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला तेज कर दिया है।

कुल मिलाकर नौकरशाही के हावी होने से विपक्ष के विधायकों के साथ ही सरकार के मंत्री और विधायक भी परेशान हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने खुद ही साफ कहा कि मैं सरकार को इस मामले में तीसरी बार निर्देशित कर रही हू बाबजूद इसके भी नौकरशाही में कोई सुधार देखने को नहीं मिला, देखना होगा राज्य में कबतक नौकरशाही में सुधार देखने को मिलता है

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