पुराने गुंडे मिट्टी में मिल गए, नए पैदा हुए तो वो भी मिला दिए जाएंगे… बलिया के कोतवाल का मोहर्रम की बैठक में विवादित बयान, वीडियो वायरल

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक पुलिस इंस्पेक्टर का बेहद कड़क और विवादित बयान सामने आया है, जिसमें वे मोहर्रम के त्योहार को लेकर आयोजित ‘पीस कमेटी’ (शांति समिति) की बैठक में अपराधियों और हुड़दंगियों को खुली चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। रसड़ा कोतवाली में आयोजित इस बैठक का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर इंटरनेट यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है। वीडियो में थानाध्यक्ष योगेंद्र बहादुर सिंह साफ तौर पर कहते दिख रहे हैं कि “पुराने वाले गुंडे मिट्टी में मिल गए हैं, और जो नए पैदा होंगे, उन्हें भी मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”

मोहर्रम पर सकुशल ताजिया जुलूस निकालने को लेकर बुलाई गई थी बैठक

जानकारी के अनुसार, रसड़ा कोतवाली में मोहर्रम के त्योहार को शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से इलाके के संभ्रांत नागरिकों, मुस्लिम समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों, समाजसेवी और ताजिया जुलूस के आयोजनकर्ताओं के साथ एक समन्वय बैठक बुलाई गई थी। इसी बैठक को संबोधित करते हुए थानाध्यक्ष योगेंद्र बहादुर सिंह भावुक और आक्रामक हो गए। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि ताजिया निकालने के दौरान किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या आगे-पीछे चलने को लेकर किया जाने वाला आपसी विवाद कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘इंसानियत के ढंग से चलेगा काम, कुरान में नहीं लिखा कि कौन सा ताजिया आगे रहेगा’

वायरल वीडियो में थानेदार बोलते दिख रहे हैं, “गुंडागर्दी से आगे चलेंगे तो गुंडागर्दी नहीं चलेगी। इंसानियत का ढंग चलेगा, इंसानियत के हिसाब से सब चलेगा। आगे-पीछे को लेकर हम अलग क्यों होना चाहते हैं, हम सब एक हैं। इसी तरह दुर्गा पूजा में भी आगे-पीछे चलने को लेकर पहले विवाद होता था, लेकिन अब यह सब खत्म हो चुका है। सारे गुंडे मिट्टी में मिल गए हैं, अब जो नए गुंडे पैदा होंगे वह भी मिट्टी में मिल जाएंगे।” उन्होंने आगे धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि कुरान में कहीं नहीं लिखा है कि कौन सा ताजिया आगे जाएगा, यह सारी व्यवस्थाएं हमने खुद बनाई हैं, इसलिए त्योहार को सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाएं।

सोशल मीडिया पर बंटी जनता की राय: कोई बता रहा सख्त कानून, तो कोई कर रहा आलोचना

कोतवाल का यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां कई लोग कानून व्यवस्था को सख्त बनाए रखने और हुड़दंगियों को पहले ही सीधे लफ्जों में चेतावनी देने के लिए थानाध्यक्ष की तारीफ कर रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ, एक धड़े का मानना है कि शांति समिति जैसी संवेदनशील बैठक में इस तरह की भाषा शैली का उपयोग अनुचित है और कुछ लोग इसे एक विशेष समुदाय को मानसिक रूप से दबाने का प्रयास बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस के उच्च अधिकारियों की तरफ से इस वायरल बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

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