Knews Desk- पाकिस्तान, जो दुनिया के प्रमुख आम निर्यातक देशों में शामिल है, इस साल अपने आम निर्यात में बड़ी गिरावट का सामना कर सकता है। जून 2026 के सीजन में आम का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों और व्यापारियों के मुताबिक, इस गिरावट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव, बढ़ती शिपिंग लागत और क्षेत्रीय बाजारों में कमजोर मांग है।
पाकिस्तान इस समय लगभग 80,000 टन आम का निर्यात कर सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक था। व्यापारी संगठनों का कहना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते मालभाड़े की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां एक कंटेनर की शिपिंग लागत करीब 1,400 डॉलर थी, वहीं अब यह बढ़कर 6,000 से 7,000 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे निर्यात करना कई व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है।
दक्षिण पाकिस्तान के टंडो अल्लाहयार जैसे प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में किसान और बागान मालिक भी संकट में हैं। ‘सिंधरी’ जैसी लोकप्रिय किस्मों की खेती करने वाले कई किसानों का कहना है कि लागत बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने के कारण उनका व्यवसाय नुकसान में चला गया है। कुछ ठेकेदारों ने तो अपने अनुबंध तक छोड़ दिए हैं।
पाकिस्तान में आम की दो दर्जन से अधिक किस्में उगाई जाती हैं और यह फल देश के प्रमुख कृषि निर्यातों में शामिल है। आमतौर पर पाकिस्तान से सालाना करीब 110 मिलियन डॉलर का आम निर्यात होता है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत बाजार खाड़ी देशों, ईरान और अफगानिस्तान पर निर्भर है। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने इन बाजारों तक पहुंच को प्रभावित किया है।
अफगानिस्तान से सीमा बंद होने और ईरान में तनावपूर्ण स्थिति के कारण व्यापार मार्ग बाधित हैं, जिससे सैकड़ों ट्रक सीमा पर फंसे हुए हैं। इसी बीच घरेलू बाजार में भी आम की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन महंगाई और आर्थिक संकट के कारण लोग खरीदारी करने में असमर्थ हैं।
कराची जैसे बड़े शहरों में आम की कीमतें पिछले साल की तुलना में आधी हो गई हैं, फिर भी बिक्री कमजोर बनी हुई है। बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है, जिससे किसान और व्यापारी दोनों संकट में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की बाहरी परिस्थितियों पर निर्भरता और उसकी कमजोरियों को उजागर करते हैं, जहां कृषि और निर्यात क्षेत्र वैश्विक संकटों से सीधे प्रभावित होते हैं।