शिव शंकर सविता- कानपुर में पुलिस पर हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। 19 अप्रैल को डायल 112 के सिपाही और ट्रैफिक पुलिसकर्मी की पिटाई का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और चौंकाने वाली घटना सामने आ गई। इस बार हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र में चालान से नाराज टेंपो चालक और उसके साथी ने पुलिस बूथ पर ईंट-पत्थर बरसाकर शीशा तोड़ दिया और पुलिसकर्मियों के साथ गालीगलौज की। मामला 21 अप्रैल की रात का है। थाना क्षेत्र के घंटाघर चौराहे पर ड्यूटी के दौरान उपनिरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने रेलवे स्टेशन की ओर से आ रहे एक टेंपो को लापरवाही से चलते देखा और उसे रोक लिया। पूछताछ में चालक ने अपना नाम श्याम पांडेय उर्फ अतुल और उसके साथी ने राहुल कुशवाहा बताया। पुलिस ने वाहन चालक से लाइसेंस मांगा, लेकिन वह दिखाने में असफल रहा। इसके बाद पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने और जरूरी दस्तावेज न होने पर चालान कर दिया।
चालान कटने के बाद 20 मिनट बाद वापस लौटे युवक, बरसाए ईंट और पत्थर
बताया जा रहा है कि चालान कटने से नाराज दोनों युवक करीब 20 मिनट बाद फिर मौके पर लौटे। इस बार उनका रवैया आक्रामक था। आरोप है कि दोनों ने पुलिस बूथ को निशाना बनाते हुए ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में बूथ का शीशा पूरी तरह टूट गया। हालात बिगड़ते देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। थाना प्रभारी ललित कुमार के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।
लगातार हो रही हैं पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं
गौरतलब है कि कानपुर में हाल के दिनों में पुलिस पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। 11 अप्रैल 2026 को नरवल के ग्राम पाली में पुलिसकर्मियों को पीटने और चौकी में आग लगाने की कोशिश की गई थी। वहीं 19 अप्रैल को ही हर्ष नगर में डायल 112 में तैनात कांस्टेबल धीरेंद्र कुमार पर हमला कर उनका सिर फोड़ दिया गया और वर्दी फाड़ दी गई। इसी दिन गुमटी इलाके में ट्रैफिक सिपाही राकेश कुमार मिश्रा को कार सड़क पर खड़ी करने से मना करने पर पीट दिया गया। इसके अलावा मार्च और उससे पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें दरोगा, कांस्टेबल और महिला पुलिसकर्मियों तक को निशाना बनाया गया।