KNEWS DESK – कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद कांग्रेस अब संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन में व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। कई राज्यों के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और संगठनात्मक पदों पर बैठे नेताओं के प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है, जिसके आधार पर महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं।
हाल ही में कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के तहत डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद बीके हरिप्रसाद को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। इस फैसले को कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी अब उन राज्यों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां अगले एक-दो वर्षों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व की नजर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों पर है। इन राज्यों में चुनावी चुनौतियों को देखते हुए संगठन को और सक्रिय तथा प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु, हरियाणा, असम, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के प्रभारी बदले जा सकते हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए नए चेहरों और नई रणनीति की जरूरत है। इसके अलावा कई प्रदेश अध्यक्षों के कामकाज की भी समीक्षा की जा रही है।
राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि लंबे समय से इस पद पर बने नेताओं की जगह नए नेतृत्व को मौका देने पर विचार हो रहा है। वहीं तमिलनाडु और मणिपुर में भी संगठनात्मक बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं।
पार्टी के भीतर केवल राज्यों तक ही सीमित बदलाव नहीं होंगे, बल्कि केंद्रीय संगठन में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति में कुछ वरिष्ठ नेताओं की जगह युवा और सक्रिय नेताओं को शामिल करने की चर्चा भी चल रही है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल किया गया है, जिसे इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच इस विषय पर लगातार बैठकें हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी चुनावों से पहले संगठन को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त कर लिया जाए और राज्यों में मजबूत नेतृत्व स्थापित किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन में यह फेरबदल बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पार्टी का प्रयास है कि जिन राज्यों में उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से है, वहां संगठनात्मक मजबूती के जरिए चुनावी प्रदर्शन को बेहतर बनाया जाए।
अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसलों पर टिकी है, क्योंकि आने वाले हफ्तों में पार्टी संगठन में कई बड़े बदलावों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।