उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी यूपी की सियासत में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है। पार्टी का विशेष फोकस पूर्वांचल के साथ-साथ उन विधानसभा सीटों पर है, जहां कुर्मी और कुशवाहा समुदाय की अच्छी आबादी मानी जाती है।
Knews Desk– जेडीयू नेता और बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार रविवार को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों के संकेत दिए। मीडिया से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा कि जिस तरह बिहार में जेडीयू को सफलता मिली है, उसी तरह यूपी में भी पार्टी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी।
निशांत कुमार ने कहा कि जेडीयू एनडीए परिवार का हिस्सा है और उत्तर प्रदेश में भी पार्टी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। हालांकि, पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी घटक दल आपसी सहमति से सीटों का बंटवारा तय करेंगे।
वाराणसी दौरे के दौरान निशांत कुमार ने जेडीयू की स्थानीय इकाई के साथ सर्किट हाउस में बैठक भी की। हालांकि उनके दौरे को आध्यात्मिक यात्रा बताया गया था, लेकिन बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में जेडीयू महासचिव अवधेश सिंह और सचिव संतोष पटेल भी मौजूद रहे।
बैठक में तय किया गया कि 25 अक्टूबर को वाराणसी के कोरौता बाजार में जेडीयू की बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए उत्तर प्रदेश में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने की तैयारी में है।
जेडीयू महासचिव अवधेश सिंह के मुताबिक, 25 अक्टूबर को होने वाली जनसभा में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत पार्टी के कई अन्य नेता शामिल होंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान जेडीयू अपने चुनावी रथ की लॉन्चिंग भी करेगी।
पार्टी ने अपने चुनावी बस रूपी रथ का नाम ‘निश्चय रथ’ रखा है। इस रथ पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ ‘रोजगार मतलब नीतीश सरकार’ का नारा लिखा गया है। पार्टी की योजना इस रथ के जरिए उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और चुनावी अभियान को आगे बढ़ाने की है।
राजनीतिक विश्लेषक विजय नारायण का कहना है कि जेडीयू को उत्तर प्रदेश में सक्रिय होने में देरी हुई है। उनके मुताबिक, पार्टी को लोकसभा चुनाव के दौरान ही यूपी में अपनी गतिविधियां बढ़ानी चाहिए थीं। हालांकि, उनका मानना है कि पार्टी के विस्तार के लिहाज से यूपी में सक्रिय होना जेडीयू के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण भी जेडीयू की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। विजय नारायण के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के साथ पटेल मतदाताओं की नजदीकी बीजेपी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और पटेल वोटरों को अपने पक्ष में लाने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। उनके अनुसार, सपा के पास लालजी वर्मा जैसे मजबूत कुर्मी नेता के साथ सात कुर्मी सांसद भी हैं।
यूपी में यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 8 से 10 प्रतिशत के बीच बताई जाती है, जबकि पटेल मतदाताओं की संख्या करीब 6 से 8 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। मौर्या, कुशवाहा और शाक्य मतदाताओं को भी इसमें शामिल करने पर यह आंकड़ा करीब 14 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया जाता है। इसी कुर्मी-कोईरी और अन्य पिछड़ा वर्ग के जातीय समीकरण को जेडीयू की यूपी में सक्रियता के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।