Knews Desk- अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ा एक पुराना जमीन खरीद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मार्च 2021 की इस डील को लेकर अब नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह लेन-देन पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के अनुसार हुआ था या इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई थी।
यह विवाद उस जमीन से जुड़ा है, जिसकी दो अलग-अलग रजिस्ट्रियां एक ही दिन यानी 18 मार्च 2021 को कुछ ही घंटों के अंतराल में हुई थीं। दस्तावेजों के अनुसार, पहली रजिस्ट्री में जमीन कुसुम पाठक द्वारा सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी के नाम बेची गई थी। इस सौदे में जमीन की कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। हालांकि, सरकारी सर्किल रेट के अनुसार उस जमीन का मूल्य लगभग 5 करोड़ 79 लाख 84 हजार रुपये था, यानी पहली डील में ही घोषित कीमत सर्किल रेट से काफी कम पाई गई। इस पहली रजिस्ट्री पर लगभग 40 लाख 55 हजार रुपये का स्टांप शुल्क भी जमा किया गया था और इसे अयोध्या के उप-निबंधक कार्यालय सदर में पंजीकृत किया गया।
सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब कुछ ही घंटों के भीतर उसी जमीन की दूसरी रजिस्ट्री भी हो गई। इस दूसरी डील में जमीन को आगे बेच दिया गया और खरीदार के रूप में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े महासचिव चंपत राय का नाम सामने आया। इस दूसरी रजिस्ट्री में जमीन की कीमत अचानक बढ़कर 18 करोड़ 50 लाख रुपये दर्ज की गई। यानी कुछ ही घंटों में उसी जमीन की कीमत 2 करोड़ रुपये से बढ़कर 18.5 करोड़ रुपये हो गई, जिससे लगभग 16 करोड़ 50 लाख रुपये का बड़ा अंतर सामने आया। इसी अंतर ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला दिया है।
दस्तावेजों के अनुसार, पहली डील में खरीदार रहे सुल्तान अंसारी ही बाद में दूसरी डील में विक्रेता के रूप में दिखाई देते हैं। इस पूरे लेन-देन में कुसुम पाठक, सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी के हस्ताक्षर दर्ज बताए जाते हैं। इसी दौरान यह भी चर्चा में आया कि रवि मोहन तिवारी का जीवन स्तर इस डील के बाद बदला, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस जमीन सौदे में ट्रस्ट की ओर से गवाह के रूप में भी एक ट्रस्टी का नाम सामने आता है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या एक ही दिन में किसी जमीन की कीमत इतनी तेजी से बढ़ सकती है? क्या यह मूल्य वृद्धि बाजार परिस्थितियों के अनुसार थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण थे? और क्या इस सौदे में किसी पक्ष को अनुचित लाभ मिला?
विपक्षी दलों ने पहले भी 2021 में इस जमीन खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने उस समय ट्रस्ट की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए थे। हालांकि ट्रस्ट की ओर से तब यह कहा गया था कि सभी खरीद नियमों के अनुसार और बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर की गई हैं। अब एक बार फिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच यह पुराना मामला सुर्खियों में है। इससे जुड़े नए सवालों ने एक बार फिर पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर बहस को तेज कर दिया है।