Knews Desk- भारत और इंग्लैंड के बीच पहले टी20 मुकाबले से पहले सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा? लेकिन कप्तान श्रेयस अय्यर के एक बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया. उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन उन खिलाड़ियों का समर्थन करना चाहता है जिन्होंने कुछ महीने पहले भारत को टी20 वर्ल्ड कप जिताया था.
श्रेयस अय्यर का यह बयान टीम में स्थिरता बनाए रखने के नजरिए से देखा जा सकता है, लेकिन इस तर्क पर कई क्रिकेट विशेषज्ञ और प्रशंसक सवाल उठा रहे हैं. उनका मानना है कि यदि प्रदर्शन के बजाय सिर्फ “वर्ल्ड कप विजेता” होने के आधार पर खिलाड़ियों को लगातार मौके मिलते रहे, तो नए खिलाड़ियों के लिए रास्ता मुश्किल हो जाएगा.वैभव सूर्यवंशी पिछले एक साल में भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में रहे हैं. उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट, घरेलू टूर्नामेंट और आईपीएल में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े मैचों में रन बनाने की क्षमता के कारण उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली, लेकिन डेब्यू का इंतजार अभी भी जारी है.
श्रेयस अय्यर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव की प्रतिभा की तारीफ जरूर की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि टीम में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां वर्ल्ड कप जीतने वाले खिलाड़ियों को भरोसा और निरंतर अवसर मिले. उन्होंने डेब्यू को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और केवल इतना कहा कि “आप कभी नहीं जानते। युवा खिलाड़ी लगातार शानदार फॉर्म में है, तो क्या सिर्फ पिछले टूर्नामेंट की उपलब्धि के आधार पर चयन जारी रहना चाहिए? भारतीय क्रिकेट में हमेशा यही सिद्धांत रहा है कि टीम में जगह प्रदर्शन के आधार पर मिलती है और वही उसे बनाए रखता है.
क्रिकेट इतिहास भी बताता है कि कई बड़े खिलाड़ियों को युवा प्रतिभाओं ने चुनौती देकर ही अपनी जगह बनाई. अगर उस समय केवल अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा किया जाता, तो कई स्टार क्रिकेटरों का करियर शायद इतनी जल्दी शुरू ही नहीं हो पाता.हालांकि टीम प्रबंधन का नजरिया भी पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता. किसी भी सफल टीम में खिलाड़ियों को कुछ खराब मैचों के बाद बाहर नहीं किया जाता. लगातार बदलाव टीम के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं. यही वजह है कि कोच और कप्तान अक्सर सफल संयोजन को कुछ समय तक बरकरार रखना पसंद करते हैं.फिलहाल वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर स्थिति साफ नहीं है. इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में उन्हें मौका मिलेगा या नहीं, इसका फैसला मैच से पहले प्लेइंग इलेवन घोषित होने पर ही होगा. लेकिन इतना तय है कि उनके चयन को लेकर चर्चा अभी खत्म नहीं होने वाली.
समझ में आता है, लेकिन यदि युवा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार नजरअंदाज होता है तो यह चयन नीति पर सवाल भी खड़े कर सकता है. भारतीय क्रिकेट में आखिरकार अंतिम कसौटी हमेशा प्रदर्शन ही माना जाता रहा है.