KNEWS DESK- घरेलू और वैश्विक बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला एक बार फिर जारी है। बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं के दामों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
MCX पर सोना-चांदी के ताजा भाव
बुधवार को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1,41,300 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
वहीं चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली, जो लगभग 2 प्रतिशत टूटकर ₹2,23,850 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने-चांदी की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर नीति से पड़ रहा है।
डॉलर इंडेक्स में तेजी के चलते अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो गया है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हुई है। साथ ही अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
जून में भी दिखी थी बड़ी गिरावट
पिछला महीना भी कीमती धातुओं के लिए कमजोर साबित हुआ। MCX के आंकड़ों के मुताबिक जून में सोने की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में तो लगभग 15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
वैश्विक बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और अन्य वैश्विक घटनाक्रमों के बीच आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरों को लेकर चल रही अटकलों ने बाजार को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक और आर्थिक आंकड़े सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों के लिए अहम स्तर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
घरेलू बाजार (MCX):
- सोना सपोर्ट: ₹1,41,100 से ₹1,40,000
- सोना रेजिस्टेंस: ₹1,43,350 से ₹1,44,200
- चांदी सपोर्ट: ₹2,25,500 से ₹2,22,000
- चांदी रेजिस्टेंस: ₹2,31,000 से ₹2,34,400
सोना-चांदी की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है। वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी फेड की नीतियों पर आगे बाजार की दिशा निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेश से पहले मौजूदा रुझानों और स्तरों को ध्यान में रखना जरूरी है।