Knews Desk- अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान पात्र और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) के कार्यकाल को राज्य सरकार ने बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसी को मामले की विस्तृत और गहन जांच करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। माना जा रहा है कि इससे जांच का दायरा और भी व्यापक होगा और पूरे मामले की परतें एक-एक कर सामने आ सकती हैं।
पहले एसआईटी को 28 जून तक अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी, लेकिन अब उसे आगे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्यकाल कितने दिनों के लिए बढ़ाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच की प्रकृति को देखते हुए समय सीमा बाधा नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर इसे और भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

यह विशेष जांच दल 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित किया गया था। ट्रस्ट के अनुरोध के बाद दान पात्र में कथित गड़बड़ियों की शिकायत सामने आने पर सरकार ने यह कदम उठाया था। एसआईटी को शुरुआत में सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद अब जांच का अगला चरण और अधिक विस्तृत हो गया है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब वित्तीय लेन-देन, दान राशि के रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। इसके साथ ही कई दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित अनियमितता की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
जांच किसी तय समय सीमा से बंधी नहीं है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी को पूरा समय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि जांच में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और “दूध का दूध और पानी का पानी” कर दिया जाएगा।
एसआईटी के कार्यकाल में विस्तार के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि जांच और अधिक व्यापक होगी और अंतिम रिपोर्ट में सभी जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आएगी। पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी तेज कर दी गई है।