मन कर रहा है आत्महत्या कर लूं, ऐसी सरकार में काम नहीं करना… PMCH से हटाए जाने के बाद डॉ. एनपी सिंह का इस्तीफा, स्वास्थ्य मंत्री को बताया तानाशाह

डिजिटल डेस्क- बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (PMCH) के प्रभारी प्रिंसिपल पद से हटाए जाने के बाद वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह (एनपी सिंह) का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को बिहार सरकार द्वारा अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर बेतिया तबादला किए जाने से नाराज डॉ. एनपी सिंह ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनका दर्द और आक्रोश साफ झलका। उन्होंने व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए यहाँ तक कह दिया कि इस अपमान के बाद उनका मन आत्महत्या करने का कर रहा है।

बिना स्पष्टीकरण पूछे हटाया, यह तानाशाही रवैया: डॉ. एनपी सिंह

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. एनपी सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “नियम के मुताबिक किसी को भी पद से हटाने से पहले नोटिस दिया जाता है और स्पष्टीकरण पूछा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और सचिव ने मेरी एक बात नहीं सुनी। मुझे जो पत्र थमाया गया, उसमें कोई स्पष्टीकरण नहीं था। यह पूरी तरह से स्वास्थ्य मंत्री का तानाशाही रवैया है। साल 1988 से पीएमसीएच में मेरा एक गरिमामय कार्यकाल रहा है और एक वरिष्ठ चिकित्सक के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार बिल्कुल ठीक नहीं है।”

“मैं दुर्घटनाग्रस्त था, सचिव को जले हुए निशान भी भेजे लेकिन नहीं सुनी बात”

ड्यूटी से गायब रहने के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ. एनपी सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह किसी लापरवाही के कारण गायब नहीं थे, बल्कि एक हादसे का शिकार हो गए थे। उन्होंने कहा, “मैं दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और मुझे ‘बर्न इंजरी’ (जलने की चोट) हुई थी, जिसके बारे में पीएमसीएच में सबको पता था। मैंने स्वास्थ्य सचिव को सौ बार फोन किया और उन्हें अपनी स्थिति बताई, यहाँ तक कि अपने जले हुए निशान की तस्वीरें भी भेजीं। मैं कोई अपराधी नहीं हूँ कि मेरे साथ ऐसा सुलूक किया जाए।”

प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपों पर भी दिया दोटूक जवाब

अपने ऊपर लग रहे प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपों पर भी पूर्व प्रिंसिपल ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने ‘सुशासन बाबू’ के दौर में भी ईमानदारी से काम किया है, लेकिन अब मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। प्राइवेट प्रैक्टिस के सवाल पर उन्होंने कहा, “एक डॉक्टर होने के नाते मैं पूछना चाहता हूँ कि जहाँ मैं रहता हूँ, अगर कोई मरीज मेरे पास आ जाए तो क्या मैं एक डॉक्टर होने के नाते उसे देखना छोड़ दूँ? क्या मरीज को न देखना ही सही व्यवस्था है?” डॉ. एनपी सिंह के इस इस्तीफे और बयानों ने बिहार के चिकित्सा जगत और सियासत में नया उबाल ला दिया है।

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