रेप केस में 10 साल की सजा के बाद तरुण तेजपाल ने क्यों लिया उमर खालिद और शरजील इमाम का नाम?

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद तेजपाल ने खुद को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बताया और इसी दौरान जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र किया।

Knews Desk- बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में दोषी करार देते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश भी दिया है। इससे पहले मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था। बाद में गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। तेजपाल ने दावा किया कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका संबंध तहलका की ओर से अतीत में की गई रिपोर्टिंग से है।

तेजपाल ने कहा कि उन्होंने कई वर्षों तक ट्रायल कोर्ट में मुकदमा लड़ा और वहां से बरी हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के खिलाफ लिखने और सवाल उठाने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

उमर खालिद और शरजील इमाम का नाम क्यों लिया?

अपने खिलाफ कथित राजनीतिक प्रतिशोध की बात रखते हुए तेजपाल ने उमर खालिद और शरजील इमाम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दोनों लंबे समय से जेल में हैं। तेजपाल ने इन नामों का उल्लेख अपने इस दावे के संदर्भ में किया कि सरकार या सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि तहलका की रिपोर्टिंग से कुछ लोगों को राजनीतिक नुकसान हुआ होगा और इसी वजह से उन्हें वर्षों से निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, ये तेजपाल के अपने आरोप और दावे हैं।

कोर्ट से मांगी थी कम सजा

सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने अपनी उम्र, पत्नी और दो बेटियों का हवाला दिया। उनके वकीलों ने भी अदालत से न्यूनतम सजा देने की मांग की।

बचाव पक्ष ने दोषसिद्धि के फैसले पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की भी मांग की, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाते हुए तय समय के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है। गोवा में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर उनकी एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और बलात्कार करने का आरोप लगा था।

मामले की लंबी सुनवाई के बाद गोवा की निचली अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया और 10 साल की जेल की सजा सुनाई।

अब तरुण तेजपाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

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