आयुष्मान कार्ड से लाखों के क्लेम का आरोप, 17 बुजुर्गों को 7-8 दिन अस्पताल में रखने का मामला

Knews Desk- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मंडीदीप के एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि स्वास्थ्य शिविर के जरिए गांवों से 17 बुजुर्गों को अस्पताल लाया गया और उन्हें कई दिनों तक भर्ती रखा गया। बुजुर्गों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें पर्याप्त इलाज नहीं मिला, जबकि उनके आयुष्मान कार्ड के जरिए लाखों रुपये का क्लेम कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।

मामला मंडीदीप स्थित सार्थक अस्पताल से जुड़ा बताया जा रहा है। अस्पताल की ओर से 15 जुलाई को ग्राम सांचेत और 16 जुलाई को ग्राम विशनखेड़ी में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया था। शिविर में ग्रामीणों की बीपी, शुगर, घुटनों के दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच की गई।

आरोप है कि बेहतर इलाज का भरोसा देकर अस्पताल की गाड़ी से 17 बुजुर्गों को मंडीदीप स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्हें इलाज के नाम पर भर्ती किया गया।

कई दिनों तक अस्पताल में रखने का आरोप

बुजुर्गों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें करीब सात से आठ दिनों तक भर्ती रखा गया। उनका आरोप है कि इस दौरान ज्यादातर मरीजों को केवल एक-दो बार ड्रिप लगाई गई और उनकी वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं का अपेक्षित इलाज नहीं किया गया।

कुछ बुजुर्गों ने घर जाने की इच्छा भी जताई, लेकिन आरोप है कि उन्हें छुट्टी नहीं दी गई। इसी दौरान उनके आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

आयुष्मान कार्ड से लाखों रुपये के क्लेम का आरोप

अस्पताल से वापस लौटने के बाद बुजुर्गों ने पूरे मामले की शिकायत की। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर उनके आयुष्मान कार्ड से लाखों रुपये का क्लेम किया। मरीजों का कहना है कि उन्हें न तो क्लेम की रकम के बारे में जानकारी दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उनके कार्ड पर किस इलाज के लिए कितनी राशि का दावा किया गया।

पीड़ित भगवती बाई ने आरोप लगाया कि घुटनों के दर्द के इलाज के लिए उन्हें करीब आठ दिन अस्पताल में रखा गया, लेकिन उनकी परेशानी में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

वहीं मातादीन ने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी। उनका आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रखने के बावजूद उन्हें उचित उपचार नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि इलाज से ज्यादा कागजी प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया गया।

एक अन्य पीड़ित कन्हैया लाल मीणा ने भी अस्पताल प्रबंधन पर मनमानी करने और आयुष्मान योजना में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मामले की शिकायत सामने आने के बाद बुजुर्गों ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आयुष्मान कार्ड के जरिए कितनी राशि का क्लेम किया गया, मरीजों को किस आधार पर भर्ती किया गया और इलाज की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

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