KNEWS DESK: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनन मिश्रा फिलहाल प्रोटेम चेयरमैन के तौर पर ही काम करेंगे और उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज तक सीमित रहेगी। किसी भी नीतिगत फैसले से पहले उन्हें भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी प्रक्रिया में शामिल करना होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे. बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश BCI के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने साथ ही कहा कि राज्य बार काउंसिल के चुनाव दो सप्ताह के भीतर पूरे कराए जाएंगे। इसके बाद BCI के चुनाव को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा।
नीतिगत फैसलों पर लगाम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, मनन मिश्रा BCI का कामकाज संभाल सकते हैं। हालांकि, उन्हें नीतिगत मामलों में स्वतंत्र रूप से फैसला लेने से रोका गया है।
कोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को भी शामिल करना होगा। इस तरह फिलहाल मनन मिश्रा की भूमिका BCI के दैनिक कामकाज तक सीमित रहेगी।
याचिकाओं में उठे थे कई सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने मनन कुमार मिश्रा के BCI चेयरमैन पद पर बने रहने और उनके कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चेयरमैन के तौर पर उनकी स्थिति और अधिकारों को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं और इसके बावजूद नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने सुनवाई के दौरान BCI के पदों के कार्यकाल से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पहले चेयरमैन के कार्यकाल की अवधि दो साल थी, जिसे बाद में बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया। उन्होंने इस बदलाव को भी चुनौती दिए जाने की जानकारी अदालत को दी।
उन्होंने अप्रैल 2025 के गजट नोटिफिकेशन का भी हवाला दिया, जिसमें मनन मिश्रा के चेयरमैन चुने जाने से संबंधित जानकारी का उल्लेख था। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि BCI की चुनाव प्रक्रिया और उसके बाद पदों पर बने रहने को लेकर कई सवाल हैं।
निर्विरोध चुनाव पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान BCI में निर्विरोध चुनाव का मुद्दा भी सामने आया। वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने कहा कि चुनाव लगातार निर्विरोध होते रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि व्यक्तिगत मुद्दों के बजाय कानून और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया जाए।
अदालत ने कहा कि राज्य बार काउंसिल के चुनाव जारी हैं और इन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों के चुने जाने के बाद BCI के अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
2014 से लगातार निर्विरोध चुने जाने का दावा
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि मनन कुमार मिश्रा वर्ष 2014 से लगातार बार काउंसिल के अध्यक्ष निर्विरोध चुने जाते रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और इसे BCI के लोकतांत्रिक कामकाज से जोड़कर अदालत के सामने अपनी दलील रखी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मनन मिश्रा प्रोटेम चेयरमैन के तौर पर BCI का रोजमर्रा का कामकाज संभालते रहेंगे, लेकिन महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के लिए उन्हें अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को प्रक्रिया में शामिल करना होगा। राज्य बार काउंसिल के चुनाव पूरे होने के बाद BCI के चुनाव को लेकर अगला फैसला किया जाएगा।