वोटर लिस्ट में कटौती,जीत की चुनौती !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हर राजनीतिक दल ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है, वही प्रशासन भी चुनाव की रूपरेखा बनाने में जुटा है। इसी कड़ी में चुनाव से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम यानी एसआईआर की प्रक्रिया को बेहद अहम माना गया और अब इसके अंतिम चरण में फाइनल वोटर लिस्ट भी जारी कर दी गई है। लेकिन इसी अंतिम सूची ने चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे दलों की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल, एसआईआर के बाद जारी आंकड़ों ने 2027 के चुनाव से पहले नया गणित खड़ा कर दिया है। 2022 विधानसभा चुनाव की तुलना में प्रदेश में 11 लाख से ज्यादा मतदाता कम हुए हैं। विधानसभा स्तर पर सबसे बड़ा असर देहरादून की धर्मपुर सीट पर दिखा है, जहां 57 हजार 318 नाम कम हुए हैं। इसके अलावा देहरादून कैंट, ऋषिकेश, रायपुर और राजपुर रोड जैसी मैदानी सीटों पर भी मतदाताओं की संख्या घटी है। मैदानी क्षेत्रों में कमी का असर ज्यादा है। ऐसे में इन सीटों पर बदली हुई मतदाता संख्या पुराने चुनावी समीकरण और दलों की रणनीति को सीधे प्रभावित कर सकती है। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को लेकर बड़ा वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया है। 11 लाख से अधिक मतदाता कम होने के चलते अब एक महीने तक बूथ स्तर पर विशेष अभियान चलेगा। इसकी शुरुआत हो चुकी है और 12 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इस दौरान पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए मौके पर ही फॉर्म-6 भरवाए जाएंगे और प्रक्रिया में बूथ लेवल एजेंट के हस्ताक्षर भी अनिवार्य होंगे। उधर कटे हुए नामों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच दावे और तंज का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

उत्तराखंड में एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद मतदाता सूची के आंकड़ों ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नया गणित तैयार कर दिया है. 2022 विधानसभा चुनाव के मुकाबले प्रदेश में 11 लाख से ज्यादा मतदाता कम हुए हैं. मतदाता सूची में आया यह बदलाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है.ऐसे में पार्टियों को 2022 के बूथवार मतदान आंकड़ों को मौजूदा मतदाता सूची से दोबारा मिलाना होगा.हालांकि केवल मतदाताओं की संख्या घटने से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि किसी एक राजनीतिक दल को सीधा फायदा या नुकसान हुआ है.विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग की मदद से चुनाव में गड़बड़ी की पूरी कोशिश की है और अपनी इस पहली कोशिश में भाजपा सफल भी हुई है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस आगामी चुनाव में सरकार बना कर दिखाएगी.इस पर भाजपा के ऊपर लग रहे आरोपों पर भाजपा का मानना है की निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सूची में मतदाताओं के नाम काटकर जो बदलाव किया है, वह बिल्कुल सही है. यह बदलाव चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी करने के लिए किया गया है और फर्जी तरीके से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले या दूसरी जगह शिफ्ट होने के बावजूद भी मतदाता सूची में जगह बनाने वालों के नाम काटे गए हैं.ऐसे में चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने भारी संख्या में कटे नामों को लेकर सरकार और निर्वाचन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है.

कुल मिलाकर, 11 लाख मतदाताओं के कम होने से 2027 की विधानसभा सीटों का पूरा समीकरण बदल सकता है। खासकर देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसी मैदानी सीटों पर जहां मतदाता संख्या में गिरावट सबसे ज्यादा है,वहां पुराने समीकरण अब नए सिरे से बनेंगे। दलों को अब बूथ स्तर पर मेहनत दोगुनी करनी होगी, क्योंकि हर वोट का गणित पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं निर्वाचन आयोग का यह वेरिफिकेशन अभियान मतदाता सूची को और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। घर-घर सत्यापन और फॉर्म-6 की मौके पर व्यवस्था से छूटे हुए पात्र मतदाताओं को जोड़ने में मदद मिलेगी। लेकिन इस प्रक्रिया में तेजी और निष्पक्षता दोनों जरूरी होंगी, ताकि किसी योग्य मतदाता का नाम न छूटे। ऐसे में एसआईआर की यह फाइनल लिस्ट चुनाव से पहले सभी दलों के लिए चेतावनी भी है और चुनौती भी। अब देखना होगा कि कौन सा दल इस नए वोटर गणित को समझ कर मैदान में बाजी मारता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *