सिलीगुड़ी पहुंचे अमित शाह, चिकन नेक की सुरक्षा पर मंथन; 22 अगस्त को होगी हाईलेवल बैठक

Knews Desk- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनके दौरे का मुख्य एजेंडा सीमा सुरक्षा, बॉर्डर मैनेजमेंट और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय है। रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की वजह से इस दौरे को खास अहमियत दी जा रही है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के मुख्य भू-भाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला बेहद संकरा रास्ता है। इसी वजह से इसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह इलाका कई जगहों पर करीब 20 से 22 किलोमीटर तक संकरा है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस क्षेत्र के आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं हैं, जबकि उत्तर दिशा में चीन का तिब्बत क्षेत्र मौजूद है। सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में इस कॉरिडोर की अहम भूमिका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है।

दौरे के पहले दिन अमित शाह सिलीगुड़ी स्थित सशस्त्र सीमा बल (SSB) के फ्रंटियर मुख्यालय जाएंगे। यहां वह सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कुछ नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।

इन योजनाओं का उद्देश्य सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, जवानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है। गृह मंत्री SSB जवानों से मुलाकात कर सीमा पर आने वाली चुनौतियों और निगरानी व्यवस्था की जानकारी भी ले सकते हैं।

नेपाल-भूटान सीमा की सुरक्षा SSB के जिम्मे

SSB भारत-नेपाल की करीब 1,751 किलोमीटर और भारत-भूटान की लगभग 699 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा करता है। इन सीमाओं पर लोगों की आवाजाही और सीमापार संपर्क को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक निगरानी और इंटेलिजेंस का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

सीमा प्रबंधन में अब ड्रोन, सेंसर, सीसीटीवी, आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और डेटा आधारित निगरानी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल अहम हो गया है।

अमित शाह के दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 22 अगस्त को प्रस्तावित हाईलेवल बैठक है। गृह मंत्री इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा, बॉर्डर मैनेजमेंट, सुरक्षा व्यवस्था और सीमा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जाएगी।

बैठक में गृह मंत्रालय, केंद्रीय सुरक्षा बलों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर और रियल-टाइम कॉर्डिनेशन को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।

बांग्लादेश सीमा समेत पूरे पूर्वी क्षेत्र पर नजर

सिलीगुड़ी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बैठक का दायरा केवल नेपाल और भूटान सीमा तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है और राज्य का उत्तरी क्षेत्र नेपाल व भूटान के करीब है। इसलिए सिलीगुड़ी में होने वाली बैठक को पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर की व्यापक सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमित शाह सिलीगुड़ी में तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को शामिल किया गया है। ये तीनों कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए थे और इन्होंने अंग्रेजों के दौर के पुराने आपराधिक कानूनों की जगह ली है।

क्यों खास है अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा?

अमित शाह का यह दौरा महज प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी, आधुनिक निगरानी तकनीक और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

देश के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली इस संकरी पट्टी की सुरक्षा भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि गृह मंत्री के सिलीगुड़ी दौरे और 22 अगस्त की हाईलेवल बैठक पर सुरक्षा से जुड़े मामलों में खास नजर बनी हुई है।

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