उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हों, लेकिन प्रदेश की सियासत में पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बनने लगे हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी जुबानी जंग के बीच अब 23 साल पुराना जैनी प्रकरण भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक बयान से शुरू हुई यह बहस अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के बीच तीखी बयानबाजी तक पहुंच गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता मामले में कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस काल के दौरान तंदूर कांड और जैनी प्रकरण की याद दिलाई थी। इसके बाद हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा था कि जैनी प्रकरण में उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था। हरक ने दावा किया कि उन्होंने खुद निष्पक्ष जांच और डीएनए टेस्ट की मांग की थी और सीबीआई जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस मामले को लेकर हरक सिंह रावत पर निशाना साधा। इस पर हरक सिंह ने पलटवार करते हुए महेंद्र भट्ट के ही डीएनए टेस्ट की मांग कर दी। ऐसे में 23 साल पुराना मामला एक बार फिर राजनीतिक आरोपों का हिस्सा बन गया है। सवाल यह भी है कि क्या पुराने विवादों के जरिए वर्तमान मुद्दों का जवाब दिया जा रहा है या फिर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया अध्याय शुरू हो गया है। बहरहाल, इस सबके चलते आपसी बयानबाज़ी चरम पर देखी जा रही है।
उत्तराखंड की सियासत में जहाँ एक ओर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जहाँ भाजपा पर हमलावर नज़र आ रहे है, वही जवाबदेही में भाजपा ने लगभग दो दशकों से सियासती कब्र में दफन 23 साल पुराने जैनी प्रकरण को पुनः सुर्खियों में ला कांग्रेस पर हमला बोला है। हुआ यूँ कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तंदूर कांड और जैनी प्रकरण की याद दिलाई थी। इसके बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए जैनी प्रकरण में राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की बात कही थी। यही नहीं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने दावा किया कि सीबीआई जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है और उन्होंने खुद निष्पक्ष जांच के लिए मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस मामले को लेकर हरक सिंह पर निशाना साधने का काम किया। जिसके जवाब में हरक ने महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट की मांग कर दी। अब यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी का नया केंद्र बन गया है। उधर,असम की रहने वाली जैनी ने खुद विडिओ जारी कर उनके नाम पर राजनीति न करने का आग्रह किया है। इसके बाद भी भाजपा हरक सिंह रावत पर निशाना साधने में पीछे नहीं हट रही है। भाजपा ने हालही हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत के सोशल मीडिया पर दिये बयान को मोहरा बना, हरक सिंह सहित कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है। जिसके चलते जमकर राजनीति हो रही हैं।
आपको बता दे, कि जून 2003 में सामने आए जैनी प्रकरण ने उस वक्त उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एन डी तिवारी की सरकार में रहे मंत्री हरक सिंह रावत पर लगे जैनी के बच्चे के पिता होने के आरोपों के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, सीबीआई जांच और डीएनए रिपोर्ट में बच्चे के साथ उनका डीएनए मैच नहीं हुआ और उन्हें क्लीन चिट मिल गई। अब करीब 23 साल बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है।अंकिता भंडारी प्रकरण से शुरू हुई बहस अब जैनी कांड और डीएनए जांच की मांग तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पुराने प्रकरणों का जिक्र कर कांग्रेस को घेर रहे हैं, तो हरक सिंह रावत इसे अपने खिलाफ राजनीतिक साजिश बताते हुए भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की टिप्पणी ने भी इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने है ऐसे में सवाल यही है कि क्या प्रदेश की राजनीति में पुराने विवादों की गूंज यूं ही सुनाई देती रहेगी या आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों और इससे निकल प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो पायेगी।