नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा का 26 दिन बाद रविवार को पंजाब के मानसा स्थित उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने अपने खेत में सिख रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें अंतिम विदाई दी। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में गोली लगने से मौत हुई थी।
Knews Desk – परविंदर सिंह झोटा का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव लाया गया। इसके बाद चकेरियां रोड स्थित उनके खेत में अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। इससे पहले पार्थिव शरीर को घर ले जाया गया, जहां पत्नी मनप्रीत कौर, मां अमरजीत कौर और परिवार के अन्य सदस्यों ने अंतिम दर्शन किए।
झोटा के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पार्थिव शरीर को सेंट्रल पार्क के बाहर भी अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। इस दौरान रागी सिंहों ने कीर्तन किया और सिख परंपरा के अनुसार अरदास की गई। इसके बाद उनके बच्चों ने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते में लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर में लगी थी गोली
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा शहर के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर पर गोली लगने से मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, झोटा ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचे जाने को लेकर मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार का विरोध किया था। इसके बाद गोली चलने की घटना हुई और झोटा की मौत हो गई। मामले में मेडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया गया था।
झोटा का शव करीब तीन सप्ताह से मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। परिवार और संयुक्त कार्रवाई समिति के आंदोलन के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। शनिवार को PGIMER चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंपा गया, जिसके बाद रविवार को अंतिम संस्कार किया गया।
झोटा की मौत के बाद उनके परिवार और संयुक्त कार्रवाई समिति ने मानसा में विरोध प्रदर्शन किया था। परिवार की मांगों के बाद पंजाब सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने की बात कही थी। सरकार ने मामले से जुड़े एक थाना प्रभारी, एक DSP और एक ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित भी किया था। परिवार की अन्य मांगों में झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर और उनकी प्रतिमा लगाने की मांग भी शामिल थी।