बिहार में विधान परिषद चुनाव के बाद दो निर्दलीय सदस्यों के BJP में शामिल होने के दावे ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने बाद में कहा कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता नहीं ली, बल्कि समर्थन दिया है। इस बीच तेजस्वी यादव ने दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
Knews Desk – बिहार की राजनीति में दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों को लेकर नया विवाद सामने आया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज ने हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवारों को हराया था। चुनाव जीतने के बाद दोनों नेताओं की BJP के कार्यक्रम में मौजूदगी और पार्टी में शामिल होने के उनके शुरुआती बयानों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
हालांकि, बाद में दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने BJP की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि पार्टी को समर्थन दिया है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी कहा कि दोनों निर्दलीय MLC ने पार्टी को समर्थन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद उनके औपचारिक रूप से BJP में शामिल होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
तेजस्वी यादव ने सदस्यता रद्द करने की मांग की
RJD नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दोनों MLC के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्दलीय निर्वाचित सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होते हैं, तो यह दलबदल कानून के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है।
तेजस्वी यादव ने BJP पर संविधान और लोकतंत्र का मजाक बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दोनों सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। विधान परिषद के सभापति को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार है।
BJP में शामिल होने के बाद क्यों बदला बयान?
दोनों निर्दलीय MLC पहले BJP के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन्होंने मीडिया से पार्टी में शामिल होने की बात कही थी। इसके बाद दलबदल कानून को लेकर विवाद सामने आने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल BJP को समर्थन दिया है।
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि दोनों नेताओं ने वास्तव में BJP की औपचारिक सदस्यता ली थी या केवल पार्टी को समर्थन दिया था। इस संबंध में उनके शुरुआती बयान, बाद में दी गई सफाई और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। केवल किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना अपने आप में सदस्यता समाप्त होने का आधार नहीं है।
JDU की हार के बाद NDA में भी उठे सवाल
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव में JDU को कुछ सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय राहुल राज ने JDU उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराया, जबकि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बंशीधर ब्रजवासी ने JDU के अभिषेक झा को मात दी।
इन नतीजों के बाद JDU नेता आनंद पुष्कर ने चुनाव के दौरान BJP के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि NDA के भीतर सहयोग और गठबंधन धर्म का पालन समान रूप से नहीं हुआ। हालांकि, ये आरोप उनके अपने बयान हैं।
दोनों MLC के रुख में बदलाव और तेजस्वी यादव की कार्रवाई की मांग ने बिहार में राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। यदि यह साबित होता है कि दोनों निर्दलीय सदस्यों ने निर्वाचित होने के बाद औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण की, तो उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।
फिलहाल, विवाद का केंद्र दोनों नेताओं की औपचारिक सदस्यता और उनके समर्थन के स्वरूप को लेकर है। आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाला निर्णय बिहार की राजनीति और NDA के भीतर संबंधों के लिहाज से अहम हो सकता है।