कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अमेरिकी टैरिफ, व्यापार समझौते और यूपीआई पर एमडीआर शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार लगातार समझौते कर रही है, जिसका असर देश के किसानों, कारोबारियों और आम लोगों पर पड़ सकता है.
Knews Desk- भारत पर अमेरिका की ओर से 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश एवं व्यापार नीतियों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक दबाव का खामियाजा भारतीयों को भुगतना पड़ सकता है.
अमेरिकी संसद में बुधवार को एक ऐसे विधेयक पर अंतिम मतदान होना है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देने का प्रस्ताव है. भारत भी इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकता है. हालांकि, विधेयक के पारित होने और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना इसे कानून नहीं माना जा सकता.
इसी संभावित टैरिफ को लेकर खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार की विदेश और व्यापार नीतियों की वजह से भारतीय कारोबारियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है.
‘पहले 25%, फिर 50%, अब 100% का खतरा’
खरगे ने अपने बयान में कहा कि भारतीय सामानों पर पहले 25 फीसदी और फिर 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया. अब 100 फीसदी शुल्क का खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने दावा किया कि इससे फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल, ऑटो पार्ट्स, रत्न-आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि सरकार को भारतीय व्यापारियों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.
व्यापार समझौते पर भी कांग्रेस के सवाल
खरगे ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड फ्रेमवर्क को लेकर भी सरकार को घेरा. उनके मुताबिक, इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों की भारत में पहुंच बढ़ सकती है, जिससे भारतीय किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है.
उन्होंने दावा किया कि इस फ्रेमवर्क के तहत अगले पांच वर्षों में भारत को 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीद के लिए दबाव का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इस दावे और समझौते की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.
यूपीआई पर एमडीआर शुल्क को लेकर भी विवाद
अमेरिकी टैरिफ के साथ-साथ कांग्रेस ने यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है. खरगे ने इसे सरकार की कमजोरी का उदाहरण बताया और कहा कि व्यापार, वीजा, एच-1बी इमिग्रेशन और डिजिटल भुगतान जैसे मुद्दों पर अमेरिका का दबाव बढ़ रहा है.
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी आरोप लगाया कि यूपीआई पर शुल्क लगाने का असर अंततः आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. वहीं, राहुल गांधी ने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेन-देन की संख्या भले ही कम हो, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी काफी अधिक है.
15 अक्टूबर से लागू होने की बात
खबर के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों से 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क लेने का प्रस्ताव है. इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये शुल्क तय किए जाने की बात कही गई है.
यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की जानकारी दी गई है. हालांकि, यूपीआई शुल्क से जुड़े इस बदलाव की अंतिम आधिकारिक पुष्टि और इसके लागू होने की शर्तों को संबंधित सरकारी अधिसूचना से जांचना जरूरी है.