डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और राजधानी लखनऊ में एक भाजपा नेता पर हुए हमले के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार को ‘राजनीतिक जुगाड़’ की संज्ञा देते हुए ब्राह्मण समाज की असुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।
मंत्रिमंडल विस्तार: जनहित या राजनीतिक मजबूरी?
मायावती ने अपने बयान में कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार करना सत्ताधारी दल का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन इसका असली पैमाना जनता को मिलने वाला लाभ होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इस विस्तार से सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों और युवाओं के जीवन में बेहतरी नहीं आती और महिला सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तो जनता इसे केवल ‘राजनीतिक जुगाड़’ और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ ही मानेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और मंत्रियों की संवैधानिक जिम्मेदारी केवल पद संभालना नहीं, बल्कि हर वर्ग के जान, माल और मजहब की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ब्राह्मण समाज की सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
बीएसपी प्रमुख ने लखनऊ में ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक युवा नेता पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर यूपी की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। मायावती के अनुसार, वर्तमान सरकार में ब्राह्मण समाज न केवल उपेक्षित महसूस कर रहा है, बल्कि वह अत्यधिक असुरक्षित भी है। मायावती ने अपने कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा, “बीएसपी सरकार के दौरान ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति के तहत ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को न्याय और सुरक्षा दी गई थी। आज की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है, जो बेहद चिंताजनक है।”
सोशल इंजीनियरिंग और ‘ब्राह्मण कार्ड’
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती का यह बयान उनकी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग (दलित-ब्राह्मण गठबंधन) को फिर से जीवित करने की कोशिश है। 2007 में बीएसपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में इस समीकरण की बड़ी भूमिका थी। अब एक बार फिर ब्राह्मण समाज की ‘उपेक्षा’ और ‘असुरक्षा’ को मुद्दा बनाकर वह इस वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर रही हैं। मायावती ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार के कार्यकलापों में समाज के कमजोर तबकों को न्याय मिलता हुआ दिखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक आम आदमी सुरक्षित महसूस नहीं करेगा, तब तक प्रशासनिक फेरबदल और विस्तार बेमानी रहेंगे।