बिहार के नए सीएम पर अंतिम फैसला भाजपा का, जल्द होगा नाम का ऐलान- विजय चौधरी

डिजिटल डेस्क- बिहार की सियासत में नई सरकार के गठन को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस अब भी कायम है। राजधानी पटना में राजनीतिक हलचल तेज है और सत्ता के गलियारों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। इसी बीच जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला अब भारतीय जनता पार्टी के पाले में है। विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम की अनुशंसा भारतीय जनता पार्टी ही करेगी। उनके मुताबिक, यह बीजेपी की आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है और वही नाम आगे बढ़ाया जाएगा, जिसे बाद में एनडीए विधायक दल की बैठक में औपचारिक मंजूरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री वही बनेगा, जिसे एनडीए विधायक दल अपना नेता चुनेगा, लेकिन इसमें बीजेपी की भूमिका बेहद अहम है।

जदयू के वरिष्ठ नेताओं का उमड़ रहा है हूजुम

रविवार सुबह से ही नीतीश कुमार के आवास पर गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। जदयू के कई वरिष्ठ नेता लगातार सीएम आवास पहुंच रहे हैं। इससे पहले शनिवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। इन बैठकों को सरकार गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है। वहीं, दिल्ली में भी हलचल तेज रही। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लंबी चर्चा की। इस बैठक के बाद बिहार में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

सीएम फेस को लेकर एनडीए घटक का मंथन जारी

जदयू के केंद्रीय नेता ललन सिंह के भी पटना पहुंचकर नीतीश कुमार से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है। इससे यह साफ है कि एनडीए के भीतर लगातार मंथन जारी है और सभी सहयोगी दल आपसी सहमति बनाने की कोशिश में जुटे हैं। विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि फिलहाल मंत्रिमंडल गठन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उनका कहना था कि पहले मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनेगी, उसके बाद ही मंत्रिमंडल के विस्तार और विभागों के बंटवारे पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “चंद दिन और इंतजार कर लीजिए, सबकुछ साफ हो जाएगा।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जदयू द्वारा मुख्यमंत्री के चयन की जिम्मेदारी बीजेपी पर छोड़ना एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जिससे गठबंधन में संतुलन बनाए रखा जा सके। वहीं, बीजेपी के लिए भी यह फैसला अहम है, क्योंकि उसे अपने संगठन और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधना होगा।