KNEWS DESK- सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ बातचीत का रास्ता अपनाए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है और सरकार को वांगचुक की मांगों पर बातचीत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। हजारे का कहना है कि सरकार चाहे उनकी मांगों को स्वीकार करे या अस्वीकार, लेकिन संवाद की प्रक्रिया शुरू करना आवश्यक है।
एक वीडियो संदेश जारी करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार को सोनम वांगचुक के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर मतभेद हैं तो उन्हें बातचीत और आपसी सहमति के जरिए सुलझाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बातचीत से समाधान खोजा जा सकता है तो उससे परहेज करने का कोई कारण नहीं है।
अन्ना हजारे ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी कई बार विभिन्न मुद्दों को लेकर अनशन किए हैं, लेकिन ऐसी परिस्थितियां कभी नहीं बनीं, जहां संवाद की पूरी संभावना समाप्त हो गई हो। उनके अनुसार लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष एक-दूसरे की बात सुनें और सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि यदि समाज को साथ लेकर चलना है तो विवादों का समाधान टकराव के बजाय सहमति और संवाद के माध्यम से होना चाहिए। हजारे ने चेतावनी दी कि किसी भी विवाद को लंबे समय तक खींचने से समाधान कठिन हो जाता है और इससे केवल तनाव बढ़ता है। इसलिए सभी पक्षों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ आगे आना चाहिए।
सोनम वांगचुक इन दिनों राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर वह जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। बताया गया कि उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें शनिवार को जंतर-मंतर से हटाकर एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने की कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के कई नेताओं ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार पर संविधान की भावना के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण और अहिंसक प्रदर्शन लोकतंत्र का मूल अधिकार है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे उठाने वालों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है। विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में सरकार ने कई आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने महिला पहलवानों के आंदोलन और पूर्व सैनिकों के विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनों के प्रति सरकार का रवैया लगातार सवालों के घेरे में रहा है।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे स्वयं वर्ष 2011 में लोकपाल कानून की मांग को लेकर हुए अपने ऐतिहासिक अनशन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। उनके आंदोलन ने तत्कालीन यूपीए सरकार पर व्यापक राजनीतिक दबाव बनाया था और भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी जनसमर्थन देखने को मिला था। इसी अनुभव के आधार पर हजारे का मानना है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी और लोकतांत्रिक समाधान हो सकती है।