Knews Desk– झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार, 10 अगस्त को प्रदर्शनकारी छात्रों ने झारखंड विधानसभा के घेराव का ऐलान किया है। विधानसभा मार्च से पहले छात्रों ने अपने साथियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और पुलिस के साथ किसी भी तरह की झड़प से बचने की अपील की है। छात्रों का कहना है कि उनका मकसद अपनी मांगों को सरकार तक लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाना है।छात्रों का यह आंदोलन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। कई छात्र स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सीबीआई जांच पर जोर दे रहे हैं।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने साफ किया है कि विधानसभा घेराव के दौरान उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। साथियों से अपील की गई है कि वे किसी भी उकसावे में न आएं और पुलिस के साथ विवाद या झड़प से बचें। छात्रों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य अपनी आवाज को मजबूती से सरकार तक पहुंचाना है, न कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करना।इस बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा मतभेद जांच के तरीके को लेकर बताया जा रहा है। छात्र जहां सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं, वहीं सरकार की ओर से दूसरे जांच विकल्पों पर कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने JPSC से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच की सिफारिश करने और मामले के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है। इसके अलावा आंदोलन के दबाव के बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे और प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, इन फैसलों के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी कई मांगों पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन उनकी मुख्य मांगों का अभी समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों का कहना है कि जिन 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी, उनमें से अभी केवल तीन परीक्षाएं रद्द हुई हैं। इसको लेकर भी छात्र सरकार के दावों पर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की चिंताओं को लेकर संवाद और पारदर्शिता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार छात्रों की बात सुनने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। इसके बावजूद छात्रों ने सोमवार को विधानसभा की ओर मार्च करने का फैसला किया है।अब सभी की नजर सोमवार के विधानसभा घेराव पर है। छात्रों की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील के बीच प्रशासन के सामने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे और किसी भी तरह की हिंसा या टकराव से बचेंगे। आंदोलन का अगला रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार छात्रों की मुख्य मांगों, खासकर भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच को लेकर क्या कदम उठाती है।