Knews Desk– अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के एक अहम बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी गिरकर लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
तेल की कीमतों में आई इस नरमी से भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूड
दरअसल, तेल बाजार में गिरावट की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच जल्द ही बड़ा समझौता हो सकता है। इस बयान के बाद बाजार में यह उम्मीद जगी कि पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति से जुड़ी बड़ी बाधाएं जल्द खत्म हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान से तेल निर्यात सामान्य होता है, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा। यही वजह रही कि निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी और तेल के दाम नीचे आ गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है सबसे बड़ा फैक्टर

तेल बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ रहा है। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ महीनों से आशंका थी कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर यह मार्ग बंद हो सकता है, जिससे सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ता।
हालांकि अब बातचीत आगे बढ़ने से बाजार में राहत का माहौल बना है। माना जा रहा है कि फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है और ‘जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम’ कम होगा।
2027 तक सामान्य हो सकती है सप्लाई
इसके बावजूद तेल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। Sultan Al Jaber ने कहा है कि अगर मौजूदा तनाव तुरंत खत्म भी हो जाए, तब भी मिडिल ईस्ट की तेल सप्लाई को पूरी तरह सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।