दिल्ली के युवाओं को मिलेगा 10 करोड़ का मंच, टैलेंट दिखाकर जीत सकेंगे 2.5 लाख रुपये तक का इनाम

KNEWS DESK- दिल्ली के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है, जहां उनकी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मंच देने के उद्देश्य से ‘हौसलों की उड़ान’ टैलेंट हंट स्कीम की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा शुरू की गई इस योजना का कुल बजट 10 करोड़ रुपये रखा गया है।

सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली को देश की यूथ और क्रिएटिव कैपिटल के रूप में विकसित किया जाए। इस योजना के तहत 16 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा, ताकि वे न केवल पहचान हासिल करें बल्कि आत्मनिर्भर बनकर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।

इस योजना में प्रतिभागियों को केवल गायन और नृत्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे सात अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें शास्त्रीय, लोक और आधुनिक गायन, शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य, फाइन आर्ट और डिजिटल आर्ट जैसे मूर्तिकला और पॉटरी, संगीत रचना और वाद्य संगीत, साथ ही अभिनय और रंगमंच जैसी विधाएं शामिल हैं। प्रतिभागी इस योजना के लिए www.delhitalenthunt.com पोर्टल पर मुफ्त में रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

चयन प्रक्रिया को चार चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें पहले चरण में स्क्रीनिंग के बाद करीब 24,500 युवाओं को चुना जाएगा, फिर क्लस्टर स्तर पर 2,450 प्रतिभागी आगे बढ़ेंगे, उसके बाद जोनल स्तर पर चयन होगा और अंत में 28 फाइनलिस्ट ग्रैंड फिनाले में पहुंचेंगे।

इस ग्रैंड फिनाले में चयन विशेषज्ञ जूरी और जनता की ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर किया जाएगा, जिसमें 75 प्रतिशत वेटेज जूरी और 25 प्रतिशत वेटेज जनता को दिया जाएगा। विजेताओं के लिए आकर्षक नकद पुरस्कार भी तय किए गए हैं, जिसमें पहले स्थान पर 2.5 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर 2 लाख रुपये, तीसरे स्थान पर 1.5 लाख रुपये और चौथे स्थान पर 1 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा सभी फाइनलिस्ट को सर्टिफिकेट और मेडल भी दिए जाएंगे, ताकि उनकी प्रतिभा को सम्मान मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से चुने गए युवा भविष्य में सरकार के सामाजिक अभियानों में ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी जुड़ेंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह योजना न केवल युवाओं को मंच देती है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है, जिससे दिल्ली को एक नई क्रिएटिव पहचान मिलेगी।

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