डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में दुकानों और मकानों को बचाने के लिए महिलाओं का आंदोलन शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रहा। हालांकि एक दिन पहले शासन के उच्चाधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद आंदोलनकारियों के तेवर कुछ नरम पड़े थे, लेकिन शुक्रवार सुबह से शुरू हुई नोटिस की कार्रवाई ने एक बार फिर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सुबह होते ही उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की सात टीमों ने सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में पहुंचकर दुकानदारों को नोटिस थमाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सबसे पहले आरटीओ रोड क्षेत्र की कई दुकानों को नोटिस दिए गए। अचानक हुई इस कार्रवाई से बाजार में हलचल मच गई और व्यापारियों के साथ-साथ धरने पर बैठी महिलाओं में भी चिंता बढ़ गई।
संभावित विरोध को देखते हुए तैनात किया गया अतिरिक्त पुलिस बल
संभावित विरोध को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। खासकर सेक्टर-2 में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस की मौजूदगी और नोटिस की कार्रवाई ने पूरे बाजार क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। गौरतलब है कि सेंट्रल मार्केट की महिलाएं पिछले दो हफ्तों से लगातार धरने पर बैठी हैं। वे अपनी दुकानों और मकानों को बचाने की मांग कर रही हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, परिषद के चेयरमैन पी. गुरु प्रसाद और आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह ने व्यापारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेज भी एकत्र किए और समाधान का आश्वासन दिया था, जिसके बाद आंदोलनकारियों का रुख कुछ नरम पड़ा था।
रोते हुए सांसद को सुनाई अपनी पीड़ा, मिला आश्वासन
लेकिन शुक्रवार को नोटिस की कार्रवाई ने फिर से अनिश्चितता बढ़ा दी। इसी बीच, आंदोलनरत महिलाओं के बीच मेरठ के सांसद अरुण गोविल पहुंचे। सांसद को देखते ही कई महिलाएं भावुक हो गईं और रोते हुए अपनी पीड़ा सुनाने लगीं। उन्होंने अपने घर और दुकानों को बचाने की गुहार लगाई। महिलाओं को शांत कराते हुए अरुण गोविल ने भावुक अंदाज में कहा, “मैं कोई भगवान नहीं हूं, मैं आपका भाई-बेटा हूं और आपके परिवार का ही हिस्सा हूं।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।