KNEWS DESK – बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा एक बार फिर चर्चा में हैं। हालिया विधान परिषद चुनाव के बाद उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एनडीए की ओर से उन्हें विधान परिषद भेजने का मौका नहीं मिला, जिसके बाद उनके मंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
दरअसल, दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में उनकी स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, विधान परिषद चुनाव से पहले बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करने का प्रस्ताव दिया था। बताया जाता है कि बीजेपी ने यह भी सुझाव दिया था कि दीपक प्रकाश को भाजपा के टिकट पर विधान परिषद भेजा जा सकता है। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने दोनों प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह अपनी पार्टी की अलग पहचान बनाए रखना चाहते थे।
इसी बीच विपक्ष और कुछ राजनीतिक हलकों में उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद के आरोप भी लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि सीमित विधायकों वाली पार्टी में बेटे को मंत्री बनाना पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बना है।
वहीं, कुशवाहा का दावा है कि एनडीए में हुए पुराने राजनीतिक समझौते के तहत उनकी पार्टी को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था। दूसरी ओर बीजेपी नेताओं का तर्क है कि पार्टी पहले ही उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दे चुकी है और कुशवाहा समाज को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी मिल रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आने वाले समय में दीपक प्रकाश को किसी सदन की सदस्यता मिल पाएगी या फिर उनका मंत्री पद खतरे में पड़ जाएगा।