महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अब जरूरी कर दिया गया है। इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए परिवहन विभाग ने पूरे राज्य में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले ही दिन मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं रखने वाले 1,268 चालकों को नोटिस जारी किया गया।
Knews Desk- परिवहन विभाग का कहना है कि नियम का मकसद चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को आसान बनाना है। अधिकारियों की टीमें ऑटो और टैक्सियों की जांच कर यह देख रही हैं कि चालक रोजमर्रा की बातचीत के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं।
मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR में जांच अभियान के दौरान 3,995 ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की गई। इनमें 604 चालक ऐसे पाए गए, जिन्हें दैनिक कामकाज के लिए जरूरी व्यावहारिक मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं था। इन सभी को नियमों के तहत नोटिस दिया गया।
इसके अलावा मुंबई महानगर क्षेत्र से बाहर महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में भी परिवहन विभाग ने कार्रवाई की। यहां कुल 4,222 चालकों की जांच की गई। जांच के दौरान 664 चालक मराठी भाषा के निर्धारित मानक पर खरे नहीं उतर पाए, जिसके बाद उन्हें भी नोटिस जारी कर दिया गया।
30 सितंबर तक चलेगा अभियान
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक सरकार चालकों को मराठी सीखने का पर्याप्त अवसर दे रही है। फिलहाल उन्हें भाषा का जरूरी ज्ञान हासिल करने के लिए समय दिया जा रहा है। अधिकारियों का जोर कार्रवाई से ज्यादा नियमों के पालन पर है।
परिवहन विभाग का यह विशेष अभियान 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। इस अवधि के दौरान चालकों को मराठी सीखने और अपनी भाषा संबंधी कमी दूर करने का मौका मिलेगा।
इसके बाद बढ़ेगी सख्ती
सरकार ने साफ कर दिया है कि तय समयसीमा खत्म होने के बाद भी यदि कोई चालक निर्धारित भाषा नियमों का पालन नहीं करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। यानी फिलहाल नोटिस देकर सुधार का मौका दिया जा रहा है, लेकिन आगे नियम तोड़ने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सरकार का तर्क है कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग ऑटो और टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यात्रियों से स्थानीय भाषा में सामान्य संवाद करने की क्षमता को जरूरी माना गया है। इसी उद्देश्य से परिवहन विभाग ने यह अभियान शुरू किया है।