KNEWS DESK- कुकिंग ऑयल का चुनाव करते समय सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और बनाने के तरीके को समझना भी जरूरी है। इन दिनों कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इसे पारंपरिक तरीकों से बीजों को दबाकर निकाला जाता है, जिसमें आमतौर पर ज्यादा गर्मी का इस्तेमाल नहीं होता। ऐसे में आइए जानते हैं कि कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल कैसे बनता है और अपनी रसोई के लिए इसे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

भारतीय रसोई में सरसों, मूंगफली और तिल जैसे तेलों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। हालांकि, अब लोग खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता, उसके स्रोत और प्रोसेसिंग के तरीके पर भी ध्यान देने लगे हैं। इसी वजह से कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।
कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल को बीजों या कुछ अन्य तिलहनी सामग्रियों से यांत्रिक प्रक्रिया के जरिए निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में तेल निकालने के लिए आमतौर पर अधिक तापमान का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इससे तेल का प्राकृतिक स्वाद और खुशबू काफी हद तक बरकरार रह सकते हैं। हालांकि, तेल की गुणवत्ता उसके कच्चे माल, प्रसंस्करण और भंडारण पर भी निर्भर करती है।
कैसे तैयार किया जाता है कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल?
कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल बनाने की प्रक्रिया अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के चयन से शुरू होती है। सबसे पहले बीजों की सफाई की जाती है, ताकि उनमें मौजूद धूल, मिट्टी और अन्य अशुद्धियों को हटाया जा सके। इसके बाद कोल्हू, घानी या दूसरी यांत्रिक मशीनों की मदद से बीजों को दबाकर तेल निकाला जाता है।
इस प्रक्रिया में तेल निकालने के लिए आमतौर पर बाहरी गर्मी का इस्तेमाल नहीं किया जाता या तापमान को नियंत्रित रखा जाता है। इसके बाद तेल को जरूरत के अनुसार छाना जाता है और उपयुक्त कंटेनर में पैक किया जाता है। पारंपरिक रिफाइनिंग की तुलना में कम प्रसंस्करण होने के कारण इसमें बीजों की कुछ प्राकृतिक विशेषताएं बनी रह सकती हैं। हालांकि, केवल कोल्ड-प्रेस्ड लिखा होने से तेल की गुणवत्ता की पूरी गारंटी नहीं मिलती। इसके लिए बीजों की गुणवत्ता, स्वच्छता, तेल की शुद्धता और पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण हैं।
अपनी कुकिंग स्टाइल के हिसाब से चुनें तेल
कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल खरीदते समय सबसे पहले यह देखें कि आप इसका इस्तेमाल किस तरह के व्यंजन बनाने के लिए करना चाहती हैं। अलग-अलग तेलों का स्वाद, खुशबू और फैटी एसिड प्रोफाइल अलग होता है। उदाहरण के लिए, सरसों के तेल का स्वाद तीखा होता है, जबकि मूंगफली के तेल का स्वाद अपेक्षाकृत हल्का और मेवेदार हो सकता है। तिल के तेल की अपनी अलग सुगंध होती है। इसलिए तेल का चुनाव अपने परिवार की पसंद और खाना बनाने के तरीके के अनुसार करें।
बीजों की गुणवत्ता और तेल निकालने का तरीका समझें
अच्छे तेल की शुरुआत अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों से होती है। तेल खरीदते समय यह जानने की कोशिश करें कि उसे किस प्रकार के बीजों से तैयार किया गया है और तेल निकालने की प्रक्रिया क्या है। कोल्ड प्रेसिंग में बीजों को यांत्रिक तरीके से दबाकर तेल निकाला जाता है। इसमें आमतौर पर रासायनिक सॉल्वेंट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। फिर भी, केवल उत्पादन विधि के आधार पर तेल को पूरी तरह शुद्ध या हर परिस्थिति में स्वास्थ्य के लिए बेहतर नहीं माना जा सकता।
पैकेट पर दी गई जानकारी जरूर पढ़ें
कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल खरीदते समय उसकी बोतल या पैकेट पर लिखी जानकारी को ध्यान से पढ़ें। तेल का प्रकार, सामग्री, निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख जैसी जानकारियां जांचें। इसके अलावा, भारत में बेचे जाने वाले खाद्य तेल पर लागू FSSAI लाइसेंस और अन्य जरूरी लेबल संबंधी जानकारियां भी देखें। भरोसेमंद निर्माता का उत्पाद चुनें और बहुत कम कीमत के लालच में गुणवत्ता से समझौता न करें।
तेल का इस्तेमाल तापमान के अनुसार करें
हर तेल का इस्तेमाल एक ही तरीके से करना सही नहीं होता। तेल का चुनाव करते समय उसके फैटी एसिड प्रोफाइल और गर्म करने पर उसके व्यवहार को समझना जरूरी है। कुछ तेलों का स्वाद और सुगंध तेज गर्मी में बदल सकते हैं। इसलिए जिस तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसके निर्माता की सलाह और उपयुक्त कुकिंग तापमान का ध्यान रखें। तेल को बार-बार गर्म करने या लंबे समय तक तलने के बाद दोबारा इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।
स्टोरेज और पैकेजिंग पर दें ध्यान
तेल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसे सही तरीके से रखना जरूरी है। कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल खरीदते समय बोतल की पैकेजिंग और सील की जांच करें। तेल को सीधे धूप और अधिक गर्मी से दूर रखें। बोतल खोलने के बाद उसे अच्छी तरह बंद करके रखें और लेबल पर दिए गए स्टोरेज निर्देशों का पालन करें। तेल की गंध, रंग या स्वाद में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो उसका इस्तेमाल करने से बचें।
क्या कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल सेहत के लिए बेहतर है?
कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल में कम प्रसंस्करण के कारण कुछ प्राकृतिक स्वाद और घटक बने रह सकते हैं। लेकिन इसे हर दूसरे तेल से बेहतर मानना सही नहीं है। स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव तेल में मौजूद फैटी एसिड, इस्तेमाल की मात्रा, खाना पकाने के तरीके और पूरे आहार पर निर्भर करता है। डॉ. शिल्पा वोरा, चीफ आरएंडडी ऑफिसर, मैरिको लिमिटेड और फूड्स एक्सपर्ट, सफोला के अनुसार, आज उपभोक्ता इस बात को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं कि उनका भोजन कहां से आता है और उसे किस तरह तैयार किया जाता है। खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाला तेल भी इसी जागरूकता का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल चुनते समय सिर्फ उसके नाम या प्रचार पर भरोसा न करें। उसकी गुणवत्ता, सामग्री, इस्तेमाल के तरीके और पैकेजिंग की जांच करें। साथ ही, संतुलित मात्रा में तेल का इस्तेमाल करें और अपनी जरूरतों के अनुसार सही विकल्प चुनें।