KNEWS DESK- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच हाल ही में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें महिलाओं को कथित तौर पर फांसी की सजा दिए जाने को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए ईरानी सरकार से आठ महिलाओं को रिहा करने की अपील की। ट्रंप ने दावा किया कि इन महिलाओं को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण मौत की सजा दी जा सकती है। उन्होंने अपने पोस्ट में इन महिलाओं की तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि उनकी रिहाई दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की न्यायपालिका से जुड़े आधिकारिक प्लेटफॉर्म मिजान ऑनलाइन ने बयान जारी कर कहा कि महिलाओं को फांसी की सजा दिए जाने की खबरें पूरी तरह से गलत और भ्रामक हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप “फर्जी खबरों” के आधार पर बयान दे रहे हैं और वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
ईरान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन महिलाओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से कुछ को पहले ही रिहा किया जा चुका है, जबकि अन्य पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों ने कहा कि इन मामलों में अधिकतम सजा कारावास हो सकती है, न कि मृत्युदंड जैसा दावा किया जा रहा है।
इस बीच, अमेरिका में रह रहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ईरान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एक 16 वर्षीय लड़की को कथित तौर पर हिरासत में लेकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों में बयानबाजी और अविश्वास को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर अमेरिका मानवाधिकारों का मुद्दा उठा रहा है, वहीं ईरान इसे गलत जानकारी और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप दोनों देशों के बीच चल रही संभावित बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं और पहले से ही संवेदनशील संबंधों को और जटिल बना सकते हैं।