पेरिस के नजदीक बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बने BAPS हिंदू मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और मूल्यों को यूरोप की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
Knews Desk- फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास बुसी-सेंट-जॉर्जेस में निर्मित BAPS हिंदू मंदिर अपने भव्य उद्घाटन से पहले ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। मंदिर को भारतीय आध्यात्मिकता, संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला का प्रतीक माना जा रहा है। इसके निर्माण का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप में रहने वाली नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना भी है।
उद्घाटन समारोह से पहले मंदिर के शिखरों और मुख्य गुंबद पर कलश और ध्वज की विशेष पूजा की गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष प्रार्थनाएं की गईं और विश्वभर में शांति, सद्भाव तथा सभी के कल्याण की कामना की गई।
तीन पीढ़ियां, तीन भाषाएं और एक भावना
BAPS पेरिस मंदिर महोत्सव की सबसे खास बात इसका ‘तीन पीढ़ियां, तीन भाषाएं, एक जुड़ाव’ वाला संदेश है। इस पहल के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि समय, भाषा और पीढ़ियां बदलने के बावजूद संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ाव कायम रह सकता है।
महोत्सव में अलग-अलग देशों से पहुंचे संतों और श्रद्धालुओं ने एक साझा आध्यात्मिक भावना के साथ हिस्सा लिया। BAPS के आध्यात्मिक गुरु महंत स्वामी महाराज से लेकर दुनियाभर के भक्तों में मंदिर महोत्सव को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
भारतीय वास्तुकला की दिखेगी झलक
BAPS मंदिर को पारंपरिक हिंदू मंदिर शैली को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला में शिखर, गुंबद, कलश और ध्वजदंड जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए गए हैं। मंदिर विदेशी धरती पर भारतीय स्थापत्य कला, मूर्तिकला और धार्मिक परंपराओं की झलक पेश करेगा।
माना जा रहा है कि उद्घाटन के बाद यह मंदिर पेरिस और उसके आसपास रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। साथ ही, यह यूरोप की नई पीढ़ी को भारतीय विरासत से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पेरिस में बनकर तैयार हुआ यह भव्य BAPS मंदिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक पहुंच का एक नया उदाहरण बनकर सामने आया है।