Knews Desk- उत्तर प्रदेश के भदोही जिला अस्पताल में प्रसव से इनकार और महिला के सड़क किनारे बच्चे को जन्म देने के मामले में जांच के बाद अस्पताल के स्टाफ को दोषी पाया गया है। जिलाधिकारी शैलेष कुमार के निर्देश पर सीएमओ डॉ. एसके चक ने इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. पंकज कुमार की सेवा समाप्त कर दी है। स्टाफ नर्स नीलम मौर्या को जिला अस्पताल से हटाकर औराई सीएचसी से अटैच किया गया है।
वहीं, सीएमएस डॉ. एके तिवारी और महिला चिकित्सक डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए शासन को पत्र भेजा गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का सितंबर महीने का वेतन भी रोक दिया गया है। चार सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसव पीड़िता रानी देवी को अस्पताल में उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। महिला चिकित्सक ने उसे देखने के बजाय रेफर कर दिया था। इसके बाद मीरजापुर मेडिकल कॉलेज से दोबारा जिला अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ नर्स ने प्रसव कराने से मना कर दिया। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने फोन पर स्थिति जानकर रेफर करने को कहा।
इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने रेफर पर्ची तैयार की, लेकिन एंबुलेंस नहीं बुलाई गई। परिजनों के हंगामे के बावजूद सीएमएस ने हस्तक्षेप नहीं किया। परिजनों ने आरोप लगाया था कि महिला के मुसहर समुदाय से होने के कारण उसके इलाज से इनकार किया गया। अस्पताल से घर ले जाते समय गेट के पास प्रसव पीड़ा बढ़ने पर चादर की आड़ में महिला ने बच्चे को जन्म दिया। मामले की जानकारी के बाद सीएमओ ने जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
डीएम ने निर्देश दिया है कि किसी सरकारी अस्पताल से मरीज को बिना उपचार लौटाने पर संबंधित के खिलाफ निलंबन और मुकदमे की कार्रवाई की जाएगी।