KNews Desk: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। राहत और बचाव अभियान के बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। इसके चलते नदी के आसपास के इलाकों में नई आपदा का खतरा मंडरा रहा है।राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने रसुवा में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। भोटेकोशी नदी के आसपास रहने वाले लोगों के साथ-साथ रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की अपील की गई है।
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नेपाल में बाढ़ और उसके बाद हुए हादसों में अब तक 675 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सेना और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।बचाव अभियान में करीब 18 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक करीब 7500 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। 108 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किए जाने की जानकारी है।
खराब मौसम के कारण राहत और बचाव अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। बाढ़ के पानी और मलबे ने सड़क, पुल, घरों और दूसरे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका है, जिसके चलते बचाव टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव भी बरामद किए गए हैं, लेकिन इनमें से 200 से ज्यादा शवों की अभी पहचान नहीं हो सकी है। अधिकारियों के मुताबिक शवों के लंबे समय तक पड़े रहने से स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे पहले DNA सैंपल और पहचान संख्या दर्ज की जा रही है, ताकि भविष्य में DNA मिलान के जरिए परिवार के लोगों की पहचान की जा सके।
इस मुश्किल घड़ी में भारत लगातार नेपाल की मदद कर रहा है। भारत ने राहत सामग्री और खोज-बचाव दल के साथ चौथी राहत उड़ान नेपाल भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक भारत की चौथी उड़ान काठमांडू पहुंच चुकी है और इसमें नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान के लिए जरूरी सामान भेजा गया है।वहीं, नेपाल में फंसे नागपुर के करीब 100 पर्यटकों का समूह भी सुरक्षित भारत लौट आया है। यात्रियों ने नेपाल में बाढ़ के दौरान भयावह हालात का अनुभव साझा किया। एक यात्री योगेश गावंडे के मुताबिक वे काठमांडू में फंस गए थे और उनके ठहरने की जगह से करीब 50 किलोमीटर दूर तबाही हुई थी। उन्होंने बताया कि जलस्तर बढ़ने के दौरान एक बस को पानी में डूबते हुए भी देखा।