Knews Desk– सोशल मीडिया पर एक बार फिर स्कूल फीस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस बार मामला एक नर्सरी/सीनियर KG क्लास की फीस का है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और नाराज भी। एक X (ट्विटर) यूजर साक्षी ने अपने हैंडल @Sakshi50038 से एक स्कूल की फीस रसीद शेयर की, जो देखते ही देखते वायरल हो गई।
साक्षी ने पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा कि “ट्विंकल-ट्विंकल सिखाने के लिए 2.25 लाख रुपये लिए जा रहे हैं।” उनका इशारा इस बात की ओर था कि जिस उम्र में बच्चे बुनियादी चीजें सीखते हैं, वहां इतनी भारी फीस लेना आम परिवारों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।वायरल हुई इस पोस्ट के अनुसार, यह फीस किसी कॉलेज या प्रोफेशनल कोर्स की नहीं बल्कि सीनियर KG के बच्चे की है। यानी वह उम्र जहां बच्चे अभी अक्षर पहचानना, गाना सीखना और बेसिक गतिविधियां करना शुरू करते हैं। इसके बावजूद फीस इतनी ज्यादा होने पर सोशल मीडिया पर लोगों में बहस छिड़ गई है।
फीस रसीद में यह भी बताया गया है कि 2.25 लाख रुपये सिर्फ ट्यूशन फीस है। इसके अलावा यूनिफॉर्म, कैफेटेरिया, ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्चे इसमें शामिल नहीं हैं। यानी असली कुल खर्च इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। साथ ही स्कूल की ओर से यह भी नियम बताया गया है कि एडमिशन और ट्यूशन फीस नॉन-रिफंडेबल होगी, यानी एक बार भुगतान करने के बाद पैसा वापस नहीं मिलेगा। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि आज के समय में मिडिल क्लास परिवारों के लिए इस तरह की फीस भरना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है। कुछ लोगों ने सरकार से इस पर सख्त नियम बनाने की मांग की, ताकि शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जा सके।
एक यूजर ने लिखा कि इतनी छोटी क्लास के लिए इतनी भारी फीस समझ से बाहर है और इससे आम परिवारों पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव पड़ता है। दूसरे यूजर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को बेहतर बनाना है, न कि इसे महंगा प्रोडक्ट बना देना। वहीं एक अन्य कमेंट में लिखा गया कि गलती सिर्फ स्कूलों की नहीं है, बल्कि कुछ माता-पिता भी दिखावे के लिए महंगे स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिलाते हैं, जिससे इस तरह के संस्थानों को बढ़ावा मिलता है।एक और यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि “क्या ये बच्चे को पढ़ा रहे हैं या किसी अंतरिक्ष मिशन पर भेज रहे हैं?” ऐसे कई कमेंट्स सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में शिक्षा की बढ़ती लागत पर बहस शुरू कर दी है। खासकर प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं कि क्या शिक्षा अब केवल अमीरों के लिए रह गई है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए हर साल बढ़ती फीस एक बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का निजीकरण तो हुआ है, लेकिन उसके साथ ही रेगुलेशन यानी नियंत्रण की जरूरत भी बढ़ गई है। अगर फीस स्ट्रक्चर पर निगरानी नहीं रखी गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं और शिक्षकों के कारण स्कूलों की लागत बढ़ती है, लेकिन इसके बावजूद फीस का एक संतुलित ढांचा होना चाहिए ताकि हर वर्ग के लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें।फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल पोस्ट ने एक बार फिर लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या शिक्षा का स्तर सुधारने के नाम पर फीस इतनी बढ़नी चाहिए कि वह आम आदमी की पहुंच से ही बाहर हो जाए।
इस घटना ने न सिर्फ स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, बल्कि समाज में शिक्षा और आर्थिक असमानता पर भी एक नई बहस शुरू कर दी है।