Knews Desk- नीट यूजी री-एग्जाम 2026 की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए प्रश्नपत्रों का सुरक्षित परिवहन शुरू कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लीक की संभावना को रोका जा सके।
इसी क्रम में भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान, जिसे ‘गजराज’ बताया जा रहा है, प्रश्नपत्र लेकर बिहार की राजधानी पटना पहुंचा। पटना एयरपोर्ट पर पहले से ही कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। विमान के उतरते ही सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और निर्धारित सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

इसके बाद प्रश्नपत्रों को आगे की वितरण प्रक्रिया के तहत दरभंगा और गया एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया। वहां से संबंधित परीक्षा अधिकारियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रश्नपत्र सौंपे गए। पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
गौरतलब है कि यह री-एग्जाम पिछले महीने 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद कराया जा रहा है। उस परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को रद्द कर दिया था। मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है और इस दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिन पर उम्मीदवारों को पैसे लेकर परीक्षा सामग्री उपलब्ध कराने का आरोप है।
इसी बीच एनटीए ने परीक्षार्थियों के लिए एक सार्वजनिक शिकायत पोर्टल भी शुरू किया है, जहां फर्जी वेबसाइटों, संदिग्ध गतिविधियों और पेपर लीक से जुड़ी अफवाहों की रिपोर्ट की जा सकती है। यह पोर्टल innovateindia.mygov.in/neet-ug-2026 पर उपलब्ध है। एनटीए ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा से पहले किसी भी व्यक्ति के पास प्रश्नपत्र तक पहुंच नहीं होती है और सभी दावे केवल धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। एनटीए का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े फर्जी नेटवर्क को कमजोर करना और छात्रों को धोखाधड़ी से बचाना है। अधिकारियों के अनुसार, इस बार री-एग्जाम को बेहद कम समय मात्र 37 दिनों में आयोजित किया जा रहा है, जबकि सामान्यतः इसकी तैयारी में कई महीने लगते हैं। ऐसे में रक्षा मंत्रालय, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद से प्रश्नपत्रों की छपाई, अनुवाद और वितरण प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाया गया है।