गेट बंद होते ही टूटे सपने…… NEET री-एग्जाम में देरी बनी छात्रों की मुसीबत

Knews Desk- देशभर में रविवार को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के दौरान कई शहरों से भावुक कर देने वाले मामले सामने आए, जहां कुछ छात्र मात्र एक मिनट की देरी के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गए। परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 1:30 बजे गेट बंद करने का सख्त नियम लागू था, जिसके चलते बेंगलुरु और मुंबई सहित कई जगहों पर छात्र अंदर प्रवेश नहीं कर सके।

बेंगलुरु में चार छात्राओं को समय सीमा के बाद पहुंचने पर परीक्षा केंद्र में एंट्री नहीं दी गई। गेट बंद होने से ठीक पहले 1:29 बजे अंतिम चेतावनी दी गई थी, लेकिन 1:30 बजे प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया। छात्राएं गेट के बाहर रोती और गुहार लगाती नजर आईं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक जाम और पुलिस प्रबंधन की कमी के कारण वे समय पर नहीं पहुंच पाए, जिसे लेकर गुस्सा और निराशा दोनों देखने को मिली। मुंबई के परेल इलाके में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां दो छात्रों को देर से पहुंचने पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया। यहां भी अभिभावकों ने दावा किया कि रास्तों में भारी जाम था और स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। छात्रों के बाहर रहने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

भोपाल में भी दो उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। एक मामले में अभ्यर्थी के चाचा ने बताया कि रास्ते में दुर्घटना हो गई थी, जिसके कारण देरी हुई और छात्र को प्राथमिक उपचार भी लेना पड़ा। इसके बावजूद नियमों का हवाला देकर प्रवेश से इनकार कर दिया गया। परीक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के नियमों के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी स्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। पूरे देश में हजारों परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी निगरानी, जैमर और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।

एनटीए के अनुसार, यह री-एग्जाम देश और विदेश के हजारों केंद्रों पर आयोजित किया गया, जिसमें लाखों छात्र शामिल हुए। पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद यह दोबारा परीक्षा कराई गई थी। हालांकि, इस सख्त व्यवस्था के बीच कुछ छात्रों के लिए एक मिनट की देरी जीवनभर का अफसोस बन गई, और परीक्षा केंद्रों के बाहर उनकी उम्मीदें टूटती नजर आईं।

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