टाटा संस पर RBI की सख्ती बरकरार, क्या अब बढ़ेगा शेयर बाजार में लिस्टिंग का दबाव?

Knews Desk- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को एक बार फिर ‘अपर लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी’ यानी NBFC-UL की कैटेगरी में रखा है। RBI के इस फैसले के बाद टाटा संस पर कड़ी रेगुलेटरी और सुपरवाइजरी निगरानी जारी रहेगी। इसके साथ ही कंपनी की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, टाटा संस ने अपने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के लिए आवेदन कर रखा है, जिस पर RBI का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।

RBI के नियमों के तहत बड़े आकार और वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली NBFCs को ‘अपर लेयर’ में शामिल किया जाता है। इस कैटेगरी में आने वाली कंपनियों को सामान्य NBFCs की तुलना में ज्यादा सख्त नियमों और निगरानी का सामना करना पड़ता है।

टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के एसेट्स करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये बताए गए हैं। अपने बड़े आकार और टाटा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों में हिस्सेदारी के कारण यह वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

क्या टाटा संस को करानी पड़ेगी लिस्टिंग?

सबसे बड़ा सवाल टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर है। RBI के नियमों के मुताबिक NBFC-UL के रूप में पहचान की गई कंपनियों के लिए तय अवधि के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना जरूरी हो सकता है। इसी वजह से टाटा संस की संभावित लिस्टिंग लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है।

हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू कंपनी का CIC रजिस्ट्रेशन है। टाटा संस ने इस रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के लिए RBI के पास आवेदन किया हुआ है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक यह आवेदन अभी विचाराधीन है। RBI ने यह भी साफ किया है कि टाटा संस को अपर लेयर NBFC की सूची में रखने से उसके रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लंबित आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर RBI कंपनी के आवेदन को स्वीकार कर लेता है और टाटा संस NBFC के दायरे से बाहर निकलने में सफल रहती है, तो लिस्टिंग से जुड़े नियमों की स्थिति बदल सकती है। इसलिए फिलहाल सबकी नजर RBI के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

लिस्टिंग से बचना चाहता है टाटा संस

टाटा संस पहले भी शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचने की कोशिश करता रहा है। कंपनी को 2022 में अपर लेयर NBFC के तौर पर वर्गीकृत किया गया था। इसके बाद इसकी संभावित लिस्टिंग को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने भी RBI के सामने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर चिंता जाहिर की थी। उनका तर्क था कि कंपनी को सार्वजनिक करने से टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का वर्षों पुराना स्वरूप प्रभावित हो सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई।

ऐसे में टाटा संस की लिस्टिंग का मामला केवल रेगुलेटरी जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध टाटा ग्रुप के मालिकाना ढांचे और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका से भी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RBI टाटा संस के CIC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन पर क्या फैसला करता है। यही फैसला काफी हद तक तय कर सकता है कि टाटा संस पर शेयर बाजार में उतरने का दबाव बढ़ेगा या कंपनी लिस्टिंग से बचने का रास्ता निकाल पाएगी।