KNEWS DESK – टीवी एक्ट्रेस माहिरा शर्मा का नया म्यूजिक वीडियो ‘राणाजी 2.0’ रिलीज होने के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह गाना साल 1995 की फिल्म ‘करण अर्जुन’ के सुपरहिट ट्रैक ‘राणाजी माफ करना’ का रीमेक है। गाने को लेकर जहां सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, वहीं अब इस पर ओरिजिनल गाने की स्टार ममता कुलकर्णी ने भी अपनी राय रखी है।
रीमेक पर क्या बोलीं ममता कुलकर्णी?
ममता कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें ‘राणाजी 2.0‘ में माहिरा शर्मा का काम अच्छा लगा। उनके मुताबिक, पुराने और नए गाने की प्रस्तुति पूरी तरह अलग है।
उन्होंने कहा, “पुराना गाना घाघरा-चोली, भारतीय डांस और पारंपरिक अंदाज में फिल्माया गया था, जबकि नए वर्जन को वेस्टर्न स्टाइल और मॉडर्न आउटफिट्स के साथ पेश किया गया है। इसलिए दोनों की तुलना करना सही नहीं होगा। हालांकि, पुराना गाना लोगों की यादों में बसा हुआ है, इसलिए उसे लोग आसानी से नहीं भूल सकते।”
याद किया ‘राणाजी माफ करना’ की शूटिंग का अनुभव
ममता ने ओरिजिनल गाने की शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गाने के कोरियोग्राफर चिन्नी प्रकाश थे और रिहर्सल के दौरान जो स्टेप्स सिखाए गए थे, शूटिंग के दिन उन्हें बदल दिया गया था।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह इस बदलाव से हैरान थीं, लेकिन चिन्नी प्रकाश के साथ तालमेल बिठाकर गाने की शूटिंग समय पर पूरी कर ली गई।
अब ऐसे गाने नहीं करेंगी ममता
बॉलीवुड में वापसी को लेकर ममता कुलकर्णी ने कहा कि अगर उन्हें कोई दमदार कहानी और अच्छा किरदार मिलता है तो वह अभिनय करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अब वह ‘राणाजी माफ करना’ जैसे बोल वाले गाने नहीं करेंगी।
ममता ने कहा कि अब उनकी सोच पहले से काफी बदल चुकी है और वह आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर हैं। उनके मुताबिक, अब किसी भी गाने को चुनते समय वह सिर्फ डांस नहीं, बल्कि उसके बोलों और संदेश पर भी ध्यान देती हैं।
उन्होंने कहा, “पहले मैं सिर्फ डांस स्टेप्स पर फोकस करती थी। उस समय मैं युवा थी और गानों के बोलों पर ज्यादा ध्यान नहीं देती थी। अब मेरी सोच बदल चुकी है।”
गौरतलब है कि ‘राणाजी 2.0′ को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग माहिरा शर्मा के नए अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि एक और क्लासिक गाने का रीमेक उसकी मूल पहचान को कमजोर करता है।