Knews Desk – उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष से लेकर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तक कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मेरठ में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे और उन्हें राष्ट्र प्रथम के साथ संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया।
कल मेरठ में सीएम योगी ने कहा कि वह ये न सोचें कि पार्टी ने उन्हें क्या दिया, बल्कि ये सोचें कि वह देश के लिए क्या कर रहे हैं। इससे पहले बीएल संतोष ने लखनऊ में कहा था कि वे छोटे-मोटे मामलों या विवादों के लिए थानों और चौकियों के चक्कर न लगाएं, बल्कि अपनी पूरी ताकत संगठन को मजबूत करने में लगाएं। आखिर चुनाव से महज कुछ महीने पहले भाजपा के शीर्ष नेताओं को बार-बार कार्यकर्ताओं से यह बात क्यों कहनी पड़ रही है?
लखनऊ में भाजपा की संगठनात्मक बैठकों के दौरान बीएल संतोष ने कार्यकर्ताओं से पार्टी की कमजोरियों पर खुलकर प्रतिक्रिया मांगी। बैठक में जमीनी स्तर की स्थिति, संगठन और सरकार के बीच तालमेल और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर चर्चा हुई। संघ-भाजपा की समन्वय बैठक में भी कार्यकर्ताओं और संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से थाने, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सुनवाई नहीं होने जैसी शिकायतों की चर्चा सामने आई।
21 सितंबर को मेरठ में भाजपा के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यकर्ताओं को यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं होना चाहिए कि मुझे क्या मिलेगा, बल्कि यह होना चाहिए कि मैं देश के लिए क्या कर रहा हूं। योगी ने व्यक्ति से ऊपर दल और दल से ऊपर राष्ट्र को रखने की बात कही। यह संदेश उस समय आया है जब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार संगठन के भीतर संवाद और एकजुटता पर जोर दे रहा है।
भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े पिछले दिनों लगातार अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। गोरखपुर में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता से नियमित संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया। कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा गया। तावड़े की बैठकों का मकसद यह भी रहा कि कार्यकर्ता लगातार लोगों के संपर्क में रहें और संगठन की जड़ें बूथ स्तर तक मजबूत हों।
चुनाव सिर्फ बड़े नेताओं के भाषण से नहीं जीते जाते। बूथ पर बैठा कार्यकर्ता, मंडल का पदाधिकारी, शक्ति केंद्र का संयोजक और स्थानीय नेता ही चुनावी मशीनरी को जमीन पर चलाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे और जमीनी स्थिति की समीक्षा शुरू की थी। अब 2027 से पहले पार्टी किसी भी तरह की संगठनात्मक कमजोरी को चुनाव तक ले जाना नहीं चाहती।
इसका सीधा मतलब है कि दिल्ली और लखनऊ से अब बूथ की रिपोर्ट मांगी जा रही है… कौन सक्रिय है? कौन नाराज है? कहां संगठन कमजोर है? कहां स्थानीय नेता आपस में समन्वय नहीं कर पा रहे? कहां जनता की शिकायतें पार्टी तक नहीं पहुंच रही? और सबसे अहम है कि कहां कार्यकर्ता चुनाव के लिए पूरी ताकत से तैयार है और कहां उसे फिर से जोड़ने की जरूरत है?
भाजपा-संघ की लखनऊ बैठक में कार्यकर्ताओं और संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से पुलिस थानों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर पर सुनवाई नहीं होने जैसी शिकायतों का जिक्र आया है। एक कार्यकर्ता अगर अपने क्षेत्र में किसी समस्या को लेकर अधिकारियों के पास जाता है और उसे लगता है कि उसकी बात नहीं सुनी जा रही, तो वह शिकायत सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहती। वह धीरे-धीरे संगठनात्मक असंतोष का हिस्सा बन सकती है।
भाजपा की चुनावी संरचना में बूथ स्तर के संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसीलिए नितिन नबीन से लेकर विनोद तावड़े तक लगातार बूथ संगठन की बात कर रहे हैं। नबीन के पश्चिमी यूपी दौरे में बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा हुई। तावड़े ने भी बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने को चुनावी तैयारी का आधार बताया। यानी भाजपा के लिए यह चुनाव केवल उम्मीदवारों का चुनाव नहीं है… यह संगठन की क्षमता की भी परीक्षा है।
2027 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा के लगातार हो रहे दौरे और बैठकों से एक बात साफ है कि पार्टी अब केवल चुनावी मुद्दों की तैयारी नहीं कर रही। वह अपने संगठन की अंदरूनी स्थिति को भी चुनाव से पहले दुरुस्त करना चाहती है। बीएल संतोष कार्यकर्ताओं से कमजोरियां पूछ रहे हैं। विनोद तावड़े बूथ मजबूत करने और जनता से संपर्क बढ़ाने को कह रहे हैं। संघ समन्वय बैठकों में संगठन और सरकार के बीच तालमेल की समीक्षा हो रही है।
नितिन नबीन क्षेत्रवार संगठन की नब्ज टटोल रहे हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि यह मत सोचो कि पार्टी ने तुम्हें क्या दिया, यह सोचो कि तुम देश के लिए क्या कर रहे हो। बीएल संतोष से लेकर योगी आदित्यनाथ तक एक ही संदेश बार-बार सुनाई दे रहा है कि गिले-शिकवे पीछे छोड़ो… संगठन को मजबूत करो… चुनाव के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरो।