KNEWS DESK- कर्नाटक में शनिवार रात NWKRTC की एक बस में उस वक्त यात्रियों की सांसें अटक गईं, जब बीच रास्ते में उसकी हेडलाइट अचानक बंद हो गई. रात के अंधेरे में सड़क पर रोशनी का कोई इंतजाम नहीं था. ऐसे में बस में सवार यात्रियों ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाई और चालक को आगे का रास्ता देखने में मदद की. चालक ने भी सूझबूझ और धैर्य दिखाते हुए बस को बेहद कम गति से चलाया और सभी यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया.
जानकारी के मुताबिक, घटना शनिवार रात करीब 8 बजे की है. NWKRTC की यह बस हुबली से अत्तिगेरी के लिए रवाना हुई थी. कुंडागोल तालुक के सांशी गांव के पास पहुंचते ही बस की हेडलाइट में तकनीकी खराबी आ गई. देखते ही देखते सामने का रास्ता अंधेरे में डूब गया. रात का समय होने के कारण स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई थी.
यात्रियों ने मोबाइल की टॉर्च से की मदद
बस की हेडलाइट बंद होने के बाद यात्रियों में चिंता बढ़ गई. इसके बावजूद उन्होंने घबराने के बजाय अपने मोबाइल फोन की टॉर्च ऑन कर दी. कई यात्रियों ने फोन की रोशनी को सड़क की तरफ करके चालक को रास्ता देखने में मदद की. इस अस्थायी व्यवस्था के सहारे चालक ने बस को आगे बढ़ाने का फैसला किया. चालक ने सांशी से गुडागेरी होते हुए अत्तिगेरी तक करीब 15 किलोमीटर की दूरी बेहद सावधानी के साथ तय की. रास्ते में बस की रफ्तार काफी कम रखी गई, ताकि अंधेरे में किसी तरह की दुर्घटना न हो.
15-20 मिनट का सफर डेढ़ घंटे में पूरा
आमतौर पर 15 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं. लेकिन हेडलाइट खराब होने के बाद चालक ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी और करीब डेढ़ घंटे में यह सफर पूरा किया. धीमी गति और मोबाइल टॉर्च की मदद से बस आखिरकार सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गई. इस दौरान यात्रियों को करीब डेढ़ घंटे तक बेहद सावधानी और चिंता के बीच सफर करना पड़ा. हालांकि चालक की सतर्कता के कारण किसी यात्री के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.
सरकारी बसों की हालत पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीण इलाकों में चलने वाली पुरानी सरकारी बसों की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं. यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बसों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत की मांग की है. उनका कहना है कि रात के समय हेडलाइट जैसी जरूरी व्यवस्था का अचानक खराब होना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है. लोगों ने परिवहन निगम से मांग की है कि ग्रामीण और दूरदराज के रूटों पर चलने वाली बसों की तकनीकी जांच नियमित रूप से कराई जाए, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.