संसद में बहस के बीच आधी रात को महिला आरक्षण कानून 2023 लागू करने की क्या थी वजह?

KNEWS DESK- संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। जहां एक ओर संशोधन विधेयक पर जोरदार बहस जारी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने अचानक 2023 के महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से गुरुवार रात जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यह वही कानून है, जिसे सितंबर 2023 में संसद ने पारित किया था और जो लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है।

हालांकि, इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, संसद में इस कानून में संशोधन को लेकर चर्चा चल रही है और शुक्रवार को इस पर वोटिंग भी प्रस्तावित है। ऐसे में संशोधन से पहले ही मूल कानून को लागू करने का फैसला कई लोगों को हैरान कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का यह कदम पूरी तरह तकनीकी और प्रक्रियागत है। 2023 के कानून में यह प्रावधान था कि महिला आरक्षण को जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा। मौजूदा संशोधन विधेयक में इसी प्रावधान को बदलने की कोशिश की जा रही है, ताकि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर आरक्षण लागू किया जा सके।

यानी, पहले कानून को औपचारिक रूप से लागू करना जरूरी था, ताकि उसमें संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसी वजह से अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, इस तकनीकी पहलू के बावजूद विपक्ष ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं।

जयराम रमेश ने इस फैसले को “विचित्र” बताया है। उनका कहना है कि जिस कानून में संशोधन पर अभी संसद में बहस चल रही है, उसे अचानक लागू कर देना समझ से परे है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की प्रक्रिया पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

फिलहाल, संसद में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा अपने अंतिम चरण में है और आज इस पर वोटिंग होनी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि संशोधन विधेयक किस रूप में पारित होता है और महिला आरक्षण के लागू होने की वास्तविक समयसीमा क्या तय होती है।

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