KNEWS DESK- खेलो इंडिया डायलॉग में पीएम मोदी ने सैकड़ों एथलीट्स और खिलाड़ियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय खेलों से जुड़ी उस चुनौती का जिक्र किया, जिसके कारण ओलंपिक में देश के पदकों की संख्या अपेक्षा के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओलंपिक में कई तरह के खेल होते हैं, लेकिन भारत लंबे समय से उनमें से बड़ी संख्या में हिस्सा ही नहीं लेता।
पीएम मोदी ने 2024 पेरिस ओलंपिक का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने 32 में से केवल 16 खेलों में हिस्सा लिया था। उन्होंने इसे भारतीय खेल व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, जब भारतीय खिलाड़ी कई खेलों में प्रतियोगिता में उतरते ही नहीं हैं तो उन खेलों में पदक जीतने की संभावना भी खत्म हो जाती है। दुनिया के कई देश ऐसे खेलों में लगातार पदक हासिल कर रहे हैं, जबकि भारत उनमें अपनी टीम तक नहीं उतारता।
उन्होंने कहा कि अगर देश को ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़ानी है तो खिलाड़ियों को नए खेलों में भी अपनी प्रतिभा आजमानी होगी। इसके लिए प्रतिभा की पहचान कम उम्र में करने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल पदक तालिका में भारत की स्थिति सुधारना नहीं है, बल्कि देश में खेल संस्कृति को मजबूत करना भी है।
पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से किए गए अपने ऐलान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के बीच खेल प्रतिभाओं की तलाश के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इन प्रतिभाशाली बच्चों को शुरुआती स्तर से ही प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे भविष्य में देश के लिए बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को भारत की युवा शक्ति से जोड़ना जरूरी है। उनके अनुसार, खेल केवल मेडल जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व जैसे गुण विकसित करने का भी जरिया हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि वे नए खेलों और नई चुनौतियों से डरें नहीं। भारत अगर ज्यादा खेलों में अपनी भागीदारी बढ़ाता है और प्रतिभाओं को सही समय पर पहचानकर तैयार करता है, तो आने वाले ओलंपिक में देश के पदकों की संख्या में बड़ा सुधार किया जा सकता है।