डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के गोंडा स्थित नंदिनी नगर स्टेडियम में चल रहे नेशनल ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब दिग्गज महिला पहलवान विनेश फोगाट वहां खेलने पहुंचीं। लंबे समय बाद मैट पर वापसी की उम्मीद जता रहीं विनेश को भारतीय कुश्ती संघ (WFI) ने तकनीकी और अनुशासनात्मक कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोक दिया। इसके बाद विनेश ने संघ और उसके पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
‘मुझे जानबूझकर बाहर रखने की कोशिश’ – विनेश फोगाट
प्रतियोगिता से बाहर किए जाने पर विनेश फोगाट ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने संन्यास से वापसी की सभी कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। विनेश ने कहा, “मैंने दिसंबर 2024 में ही अपनी वापसी की इच्छा जता दी थी और जून 2024 में यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) को भी सूचित कर दिया था। फिर छह महीने तक संघ शांत क्यों बैठा रहा?” विनेश ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रतियोगिता से ठीक दो दिन पहले ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया गया, ताकि उन्हें कानूनी मदद लेने का मौका न मिल सके। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह डोप टेस्ट देकर पूरी तरह क्लीन तरीके से खेलने आई हैं, लेकिन उन्हें 2026 तक अयोग्य ठहराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का नाम लेते हुए कहा कि यह सब उन्हीं के इशारे पर हो रहा है।
संजय सिंह का पलटवार: ‘अभी भी सस्पेंड हैं विनेश’
वहीं, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने विनेश के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी खिलाड़ी नियमों से ऊपर नहीं है। संजय सिंह ने कहा, “विनेश फोगाट अभी भी अनुशासनात्मक कारणों से सस्पेंड हैं। उन्हें नोटिस जारी किया गया था, जिसका संतोषजनक जवाब मिलने और प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें अनुमति नहीं दी जा सकती।” संजय सिंह ने आगे कहा कि विनेश का एक खिलाड़ी के तौर पर स्वागत है, लेकिन नियमों के खिलाफ जाकर उन्हें मौजूदा टूर्नामेंट में खेलने देना संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ केवल प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है और इसमें किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कोई द्वेष नहीं है।
कानूनी पचड़े में उलझी कुश्ती
विनेश फोगाट का कहना है कि जानबूझकर शनिवार और रविवार का समय चुना गया जब अदालतें बंद रहती हैं, ताकि वह इस फैसले के खिलाफ स्टे न ले सकें। कुश्ती गलियारों में इस घटनाक्रम को ‘अखाड़े की राजनीति’ के रूप में देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों के लिए यह निराशाजनक है कि एक ओलंपिक स्तर की खिलाड़ी को मैट पर प्रदर्शन करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों से उलझना पड़ रहा है।