Knews Desk- पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर अमेरिका खुलकर पाकिस्तान के समर्थन में उतर आया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने कहा है कि वह पाकिस्तान के “आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने के अधिकार” का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने हालिया घटनाक्रम में अफगानिस्तान के साथ सहानुभूति जताई है और पाकिस्तान की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है।दरअसल, 27 जून को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पकतीका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए थे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन एयरस्ट्राइक में कम से कम 28 आम नागरिकों की मौत हुई, जबकि 49 लोग घायल हुए। पाकिस्तान का दावा है कि उसने यह कार्रवाई कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए हमले के जवाब में की, जिसमें तीन पाकिस्तानी जवान मारे गए थे। इस हमले के लिए पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार को जिम्मेदार ठहराया है।
पाकिस्तानी हमलों के बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी जवाबी कार्रवाई की। तालिबान ने दावा किया कि उसने पाकिस्तानी क्षेत्र में हवाई हमले किए, जबकि पाकिस्तान ने कहा कि उसने बलूचिस्तान में कई ड्रोन मार गिराए और इसके बाद अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में तालिबान के हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया।इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान की कार्रवाई को आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है और उसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अफगान तालिबान को अब भी आतंकवादी संगठन के रूप में देखता है।
विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में तेजी से सुधार हुआ है। पाकिस्तान अमेरिका का प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (Major Non-NATO Ally) भी है और हाल के महीनों में पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर उसने अमेरिका के साथ समन्वय बढ़ाया है।दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह टीटीपी और अन्य उग्रवादी संगठनों को अपने यहां सुरक्षित पनाह देता है। हालांकि, अफगान तालिबान इन आरोपों को खारिज करता है। उसका कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद उसकी आंतरिक समस्या है और अपनी सुरक्षा में नाकामी का ठीकरा वह अफगानिस्तान पर फोड़ रहा है।
फिलहाल, दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है। सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां जारी हैं और हालात किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, अमेरिका के ताजा रुख ने इस पूरे विवाद को नई कूटनीतिक दिशा दे दी है।