KNEWS DESK- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने वाला बयान बताया। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया है।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने उन लोगों के संदर्भ में यह बात कही, जो माओवादी विचारधारा का समर्थन करते हैं या देश की एकता और संविधान के खिलाफ खड़े होते हैं।
रिजिजू ने बताई ‘दिमागी नक्सल’ की लिस्ट
रिजिजू ने अपनी पोस्ट में बताया कि प्रधानमंत्री किन लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे थे। उनके मुताबिक, इसमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि अलगाववादियों के साथ खड़े होने वाले और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बनाए रखने का समर्थन करने वाले लोग भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी के दायरे में आते हैं।
रिजिजू ने आगे दावा किया कि जो लोग पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने की कोशिशों का समर्थन करते हैं और ‘चिकन नेक’ को काटने की बात करते हैं, उन्हें भी इसी श्रेणी में रखा गया है।
PM मोदी ने लाल किले से क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत ने हथियार उठाने वाले नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि नक्सली विचारधारा अब भी अलग-अलग रूपों में मौजूद हो सकती है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश में ऐसे लोग मौजूद हैं जो ‘माओवादी सोच’ से प्रभावित हैं और अलग-अलग संस्थाओं तथा सार्वजनिक जीवन में इस विचारधारा का प्रभाव डालने की कोशिश करते हैं। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश के युवाओं को विकसित भारत के लक्ष्य के लिए एकजुट करने की आवश्यकता है।
चिदंबरम ने जताया ‘गर्व’
प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।
चिदंबरम की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘दिमागी नक्सल’ की स्पष्ट परिभाषा क्या है और इसका इस्तेमाल किन लोगों के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का कोई स्पष्ट अर्थ नहीं है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय संसद में भी ‘अर्बन नक्सल’ की परिभाषा को लेकर सवाल उठाए गए थे।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, अब प्रधानमंत्री लाल किले से ‘मेंटल नक्सल’ या ‘आइडियोलॉजिकल नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे विपक्ष को लगता है कि निशाना राजनीतिक विरोधियों पर है।
बयान पर बढ़ी सियासी बहस
प्रधानमंत्री के बयान और रिजिजू की सफाई के बाद ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री का निशाना उन ताकतों पर था जो माओवादी विचारधारा, अलगाववाद या देश की एकता के खिलाफ गतिविधियों का समर्थन करती हैं।
वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने वाली भाषा बता रहा है। फिलहाल, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है और ‘दिमागी नक्सल’ शब्द स्वतंत्रता दिवस के बाद की सियासत में नया विवाद बन गया है।