सॉफ्टवेयर की धीमी रफ्तार, खराब की-बोर्ड और छोटी स्क्रीन से परेशान हुए अभ्यर्थी; 76 उम्मीदवारों ने दर्ज कराई लिखित शिकायत
Knews Desk- बॉम्बे हाईकोर्ट में क्लर्क पद के लिए 16 अगस्त को आयोजित टाइपिंग परीक्षा के दौरान महाराष्ट्र के कई परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध जताया। वाशिम, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़ और कल्याण समेत कई केंद्रों पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर उम्मीदवारों में नाराजगी देखने को मिली।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान सॉफ्टवेयर काफी धीमा चल रहा था। कई कंप्यूटरों के की-बोर्ड में खराबी की शिकायत भी सामने आई। इसके अलावा, स्क्रीन का आकार छोटा होने और जूम इन-जूम आउट में परेशानी के चलते भी उम्मीदवारों का काफी समय प्रभावित हुआ।
शिकायत के बावजूद नहीं मिली पर्याप्त मदद
उम्मीदवारों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान तकनीकी दिक्कतों की जानकारी केंद्र पर मौजूद अधिकारियों को दी गई, लेकिन समय रहते प्रभावी समाधान नहीं किया गया। कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि तकनीकी परेशानियों के कारण वे निर्धारित समय में टाइपिंग टेस्ट पूरा नहीं कर सके।
वाशिम केंद्र को लेकर अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि कुछ सत्रों में बेहद कम उम्मीदवार सफल हुए। उनका आरोप है कि तकनीकी खामियों ने परीक्षा के परिणाम को प्रभावित किया है।
76 अभ्यर्थियों ने दी लिखित शिकायत
जानकारी के मुताबिक, पहले सत्र में करीब 60 और दूसरे सत्र में भी लगभग 60 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। अभ्यर्थियों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं। इन समस्याओं को लेकर कुल 76 उम्मीदवारों ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि जिन केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं, वहां की परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित कराया जाए, ताकि किसी उम्मीदवार को तकनीकी कारणों से नुकसान न उठाना पड़े।
केंद्र प्रबंधन ने टिप्पणी से किया इनकार
पूरे मामले पर परीक्षा केंद्र प्रबंधन ने फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। केंद्र प्रबंधकों का कहना है कि सामने आई समस्याएं केंद्र स्तर से जुड़ी नहीं थीं और इस मामले में वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों से संपर्क किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और संबंधित परीक्षा प्राधिकरण अभ्यर्थियों की शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या तकनीकी खामियों की जांच के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया जाता है।