बिहार SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, 29 जनवरी को हुआ था सुरक्षित

KNEWS DESK- बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना अहम फैसला सुनाएगा। इस मामले में देशभर की निगाहें शीर्ष अदालत पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों पर बड़ा असर डाल सकता है।

इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के पास इतने बड़े स्तर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के खिलाफ है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने की थी, जिसने 29 जनवरी को लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका में प्रमुख NGO ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR)’ भी शामिल है, जिसने प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि SIR प्रक्रिया को लागू करना NRC जैसी कवायद की तरह है, जिसमें नागरिकता की जांच की जा रही है, जबकि यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इसके अलावा, प्रक्रिया की समयसीमा और 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

चुनाव आयोग ने अपनी ओर से इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना उसके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। आयोग ने यह भी कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज नागरिकता के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है, जो यह तय करेगा कि बिहार में SIR प्रक्रिया आगे जारी रह सकेगी या इसमें कोई कानूनी बाधा आएगी। यह फैसला न सिर्फ बिहार बल्कि देश की चुनावी व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।