अनुभव और नई पीढ़ी का संतुलन, नितिन नबीन की नई टीम में बड़े बदलाव

Knews Desk- बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। 65 सदस्यीय इस टीम में पार्टी ने अनुभव और नई पीढ़ी के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। कई पुराने और भरोसेमंद चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बरकरार रखा गया है, वहीं राष्ट्रीय सचिवों, मोर्चों और मीडिया-सोशल मीडिया संगठन में बड़े पैमाने पर नए नेताओं को मौका दिया गया है।

नई राष्ट्रीय टीम में 12 महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। यानी कुल टीम में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 18.5 फीसदी है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर वसुंधरा राजे, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन दोशी, डॉ. भारती पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को जिम्मेदारी मिली है।

स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, जबकि कविता पाटीदार, फांग्नोन कोन्याक और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है। रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई है।

महामंत्री स्तर पर नई पीढ़ी को बड़ा मौका

राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर भी बीजेपी ने बड़ा बदलाव किया है। कुल 8 महामंत्रियों में 6 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें स्मृति ईरानी, विप्लव देव, सतीश पूनिया, गजेन्द्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया शामिल हैं।

वहीं सुनील बंसल और विनोद तावड़े को इस पद पर बरकरार रखा गया है। इससे साफ है कि पार्टी ने नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ संगठन के अनुभवी नेताओं की भूमिका भी कायम रखी है।

बीजेपी संगठन के अहम पदों पर निरंतरता देखने को मिली है। बीएल संतोष राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) के पद पर बने रहेंगे। शिवप्रकाश भी राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।

वहीं सौदान सिंह की सह-संगठन महामंत्री के तौर पर वापसी हुई है। इससे संगठन के शीर्ष स्तर पर अनुभव और स्थिरता को बनाए रखने का संकेत मिलता है।

राष्ट्रीय सचिवों में सबसे बड़ा फेरबदल

नई टीम में सबसे ज्यादा बदलाव राष्ट्रीय सचिवों के स्तर पर नजर आता है। कुल 16 राष्ट्रीय सचिवों में 14 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, डॉ. भोला सिंह, डॉ. प्रदीप वर्मा, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, डॉ. संदीप पाठक, संगीता यादव, डॉ. एम. वेंकटेशन, मनोज तिग्गा, सिद्धार्थ शंभू, डॉ. स्वदेश सिंह, मृगांक देव बर्मन, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश शामिल हैं।

फांग्नोन कोन्याक और अनिल एंटनी को बरकरार रखा गया है। इस स्तर पर करीब 87 फीसदी नए चेहरे होना बताता है कि बीजेपी संगठन के मध्य स्तर पर नई पीढ़ी को तेजी से आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पीयूष गोयल को मिली अहम जिम्मेदारी

पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। उनकी नई संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह केंद्रीय मंत्री की भूमिका में बने रहेंगे। हालांकि इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

राजेश मंगल को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वह लंबे समय से पार्टी के वित्त विभाग से जुड़े रहे हैं।

वहीं तरुण चुघ को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी से हटाकर पार्टी मुख्यालय का प्रभारी बनाया गया है। इससे उनकी भूमिका अब केंद्रीय कार्यालय के संचालन और संगठनात्मक व्यवस्था पर अधिक केंद्रित होगी।

सातों मोर्चों में नए अध्यक्ष

बीजेपी ने अपने सभी सात मोर्चों के अध्यक्षों में बदलाव किया है। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी डॉ. हेमांग जोशी, महिला मोर्चा की रूप कुमारी चौधरी, ओबीसी मोर्चा की अमरपाल मौर्य और किसान मोर्चा की बंसीलाल गुर्जर को दी गई है। इसके अलावा एससी मोर्चे की कमान शिवेश कुमार राम, एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी डॉ. मन्नालाल रावत और अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान कुंवर बासित अली को सौंपी गई है।

इन बदलावों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच संगठन की पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की। बीजेपी की मीडिया और सोशल मीडिया टीम में भी महत्वपूर्ण फेरबदल हुआ है। अनिल बलूनी को बरकरार रखा गया है, लेकिन उनके साथ सह-प्रभारी रहे संजय मयूख को नई टीम में जगह नहीं मिली है। उनकी जगह आशीष अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

सोशल मीडिया की जिम्मेदारी अब अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को दी गई है। उनके साथ प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

नई टीम का क्या है फॉर्मूला?

नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम को देखें तो बीजेपी ने साफ तौर पर अनुभव और बदलाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक तरफ बीएल संतोष, सुनील बंसल और विनोद तावड़े जैसे अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखा गया है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सचिवों, मोर्चों और मीडिया-सोशल मीडिया टीम में बड़े पैमाने पर नए चेहरों को आगे लाया गया है।

65 सदस्यीय टीम में 12 महिलाएं, 16 राष्ट्रीय सचिवों में 14 नए चेहरे, 8 महामंत्रियों में 6 नए चेहरे और सातों मोर्चों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति इस बदलाव की तस्वीर साफ करती है।

कुल मिलाकर बीजेपी की नई टीम पूरी तरह पुराने चेहरों पर निर्भर नहीं है और न ही पूरी तरह नई पीढ़ी को सौंप दी गई है। करीब 50 साल की औसत उम्र वाली यह टीम अनुभव, युवा नेतृत्व, महिला भागीदारी और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन को साथ लेकर चलने की रणनीति का संकेत देती है।

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