KNEWS DESK- साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपनी मेहनत और दमदार अभिनय के दम पर उन्होंने कन्नड़ सिनेमा से निकलकर पैन इंडिया स्टार के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। फिल्म ‘KGF’ के बाद उनकी लोकप्रियता देशभर में पहुंची। अब यश अपनी अपकमिंग फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने करियर, संघर्ष, स्टारडम और नेपोटिज्म जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की।
एक इंटरव्यू में यश से फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म को लेकर सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि अल्लू अर्जुन, चिरंजीवी और थलपति विजय जैसे कलाकारों को फिल्मी परिवार से होने का फायदा मिला। इस पर यश ने कहा कि आखिरकार इंडस्ट्री में फैसला दर्शक ही करते हैं।
‘एक्टर का बेटा एक्टर बन जाएगा, कोई दिक्कत नहीं’
नेपोटिज्म पर अपनी राय रखते हुए यश ने कहा कि अगर किसी एक्टर का बेटा एक्टर बनता है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, उन्होंने माना कि फिल्मी बैकग्राउंड के बाहर से आने वाले लोगों के लिए शुरुआती सफर थोड़ा मुश्किल होता है। यश के मुताबिक, फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकार भी अपने साथ एक तरह का दबाव लेकर इंडस्ट्री में कदम रखते हैं। उनके पिता की पहचान और उनकी सफलता का बोझ भी उनके साथ रहता है। इसलिए उनके संघर्ष को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यश ने कहा कि उनके जैसे लोगों के लिए इंडस्ट्री में पहली सीढ़ी ढूंढना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन एक बार मौका मिल जाए तो आगे बढ़ना कलाकार की अपनी मेहनत पर निर्भर करता है।
‘मुझे लोगों ने जितना चढ़ाया, उससे ज्यादा मैं चढ़ा हूं’
यश ने अपने सफर के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके करियर में दर्शकों का योगदान सबसे बड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्होंने जितनी मेहनत की, उससे कहीं ज्यादा लोगों ने उन्हें आगे बढ़ाया।
यश का मानना है कि किसी भी कलाकार के करियर में दर्शकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। आखिर में वही तय करते हैं कि कौन स्टार बनेगा और कौन लंबे समय तक टिकेगा।
पैन इंडिया स्टारडम पर भी बोले यश
यश से राम चरण, अल्लू अर्जुन, जूनियर एनटीआर और महेश बाबू जैसे बड़े सितारों से तुलना को लेकर भी सवाल किया गया। इन सभी का फिल्मी बैकग्राउंड है, लेकिन यश ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इस पर यश ने कहा कि ऐसा नहीं है कि दूसरे कलाकार सफल नहीं हैं। हर कलाकार अपनी जगह अच्छा काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ‘स्टारडम’ और ‘पैन इंडिया स्टार’ जैसे शब्द सिर्फ किसी कलाकार की लोकप्रियता को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि असली चीज यह है कि कलाकार ने क्या काम किया है और उस काम का लोगों पर कितना प्रभाव पड़ा है।
‘आज स्टार हो, अगले शुक्रवार कुछ भी नहीं’
यश ने स्टारडम को लेकर भी अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि स्टारडम कोई स्थायी चीज नहीं है। एक शुक्रवार को कोई कलाकार स्टार हो सकता है और अगले शुक्रवार किसी और का नाम चर्चा में आ सकता है। यश के मुताबिक, कलाकार अपने पुराने काम की सफलता को लेकर हमेशा जश्न मनाकर नहीं बैठ सकता। हर फिल्म के साथ उसे फिर से मेहनत करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि सभी कलाकार कड़ी मेहनत करते हैं। आज किसी का नाम होगा तो अगले हफ्ते किसी और का हो सकता है। असली सवाल यह नहीं है कि कौन आगे है और कौन पीछे, बल्कि यह है कि कौन लंबे समय तक टिकता है और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखता है।